रिपोर्ट- हिमांशु दुबे
इन दिनों पड़ोसी देश बांग्लादेश से आ रही हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा की तस्वीरों ने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया है. इसी मुद्दे पर अब कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है और केंद्र सरकार से बड़े कदम उठाने की मांग की है. भारत एक्सप्रेस के संवाददाता हिमांशु दुबे से एक खास बातचीत के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सनातन धर्म और हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता जाहिर की.
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दो-टूक शब्दों में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो अमानवीय व्यवहार हो रहा है, उसे भारत मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकता. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि वक्त आ गया है कि इन कट्टरपंथी ताकतों को कड़ा सबक सिखाया जाए. उन्होंने सुझाव दिया कि अगर जरूरत पड़े, तो सरकार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे किसी विशेष सैन्य या कूटनीतिक ऑपरेशन को अंजाम देना चाहिए, ताकि वहां रहने वाले सनातनी भाई-बहन सुरक्षित महसूस कर सकें.
यह बातचीत उस मौके पर हुई जब अमेरिकन हिंदू एसोसिएशन द्वारा निकाली गई ‘सनातन एकजुटता यात्रा’ का उत्तर प्रदेश चरण संभल के कल्कि धाम में संपन्न हुआ. यह यात्रा प्रयागराज की पवित्र धरती से शुरू हुई थी और यूपी के सभी 75 जिलों से गुजरते हुए आज अपने गंतव्य पर पहुंची.
इस समापन अवसर पर कल्कि धाम में भव्य यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें आहुतियां देकर विश्व कल्याण की कामना की गई. इसके बाद ‘संभल का इतिहास और सनातन का भविष्य’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ, जहां देशभर से आए संतों और विद्वानों ने अपनी बात रखी.
वहीं, अमेरिकन हिंदू एसोसिएशन के प्रमुख बाबा अनल ने भी सनातनियों की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि पहले सनातनी समाज अलग-अलग जातियों और संप्रदायों में बंटा हुआ था, जिसका बाहरी ताकतों ने फायदा उठाया. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है.
बाबा अनल ने उत्साह के साथ कहा, “उत्तर प्रदेश तो केवल शुरुआत है. हमें लोगों का जो प्यार और समर्थन मिला है, उसने हमारा हौसला बढ़ा दिया है. अब हम इस यात्रा को देश के सभी 700 जिलों में ले जाएंगे.” उन्होंने यूपी को अपनी यात्रा के पहले चरण के लिए इसलिए चुना क्योंकि यह वह पावन भूमि है जहां राम और कृष्ण ने अवतार लिया और जहां भविष्य में भगवान कल्कि का अवतरण होने वाला है.
इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही था कि सनातन धर्म अब रक्षात्मक मुद्रा से बाहर निकलकर एकजुट हो रहा है. चाहे वह विदेशों में रहने वाले भारतीय हों या देश के भीतर के लोग, सभी का मानना है कि अपनी जड़ों और अपनी सुरक्षा के लिए अब साथ आना अनिवार्य हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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