Air Quality Index
Air Quality Index : दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में है. नवंबर का महीना शुरू होते ही राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ने लगी है. सुबह-शाम सड़कों पर धुंध की मोटी परत देखने को मिल रही है, जो वास्तव में धुएं और धूल का मिश्रण है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से ऊपर पहुंच गया है, जो “गंभीर श्रेणी” में आता है. यह स्तर न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है.
राजधानी दिल्ली के प्रमुख क्षेत्रों में Air Quality Index बेहद खराब है. सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, आईटीओ: AQI 420, अक्षरधाम: AQI 412, बवाना: AQI 403, लोधी रोड: AQI 377, आनंद विहार: AQI 371, गुरुग्राम: AQI 290, गाजियाबाद: AQI 311, नोएडा: AQI 275 ये स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक है.
इनमें से आईटीओ, अक्षरधाम और बवाना जैसे क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता इतनी खराब है कि विशेषज्ञों ने इसे “स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक” बताया है. सुबह के समय हवा में धुएं की गंध स्पष्ट महसूस की जा सकती है, जिससे आंखों और गले में जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं.
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कई कारक हैं, लेकिन चार प्रमुख कारण लगातार स्थिति को गंभीर बना रहे हैं.
1. पराली जलाना:
हर साल की तरह इस बार भी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ गई हैं. खेतों में जलाई गई फसल अवशेष से उठने वाला धुआं वायुमंडल में मिलकर दिल्ली की ओर बढ़ता है और यहां की हवा को जहरीला बना देता है. उपग्रह चित्रों के अनुसार, इस सप्ताह पराली जलाने की घटनाओं में 30% की वृद्धि दर्ज की गई है.
2. वाहनों से निकलने वाला धुआं:
दिल्ली की सड़कों पर रोज़ाना लाखों वाहन चलते हैं. इनमें से बड़ी संख्या पुराने और डीजल वाहनों की है, जो प्रदूषण का मुख्य स्रोत हैं. ट्रैफिक जाम के दौरान वाहनों से लगातार निकलने वाला धुआं हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन कणों की मात्रा बढ़ा देता है.
3. निर्माण कार्यों से उठती धूल:
दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार निर्माण कार्य चल रहे हैं. भवन निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और मेट्रो विस्तार परियोजनाओं से उठने वाली धूल हवा में सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) के रूप में फैलती है, जो सांस के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारियों का कारण बनती है.
4.आतिशबाजी का प्रभाव:
त्योहारों के दौरान लोगों ने आतिशबाजी की, जिससे वायु में सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों की मात्रा बढ़ गई. यह पहले से ही प्रदूषित वातावरण में और जहर घोलने का काम करती है.
दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में पिछले कुछ दिनों में सांस की तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक इस तरह की हवा में रहना फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है.
विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. लोगों से कहा गया है कि वे सुबह की सैर या आउटडोर एक्सरसाइज़ से बचें और घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग करें.
दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई प्रतिबंध लागू किए हैं. निर्माण कार्यों को सीमित किया गया है, स्कूलों में आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगाई गई है, और पानी के छिड़काव तथा एंटी-स्मॉग गन के उपयोग को बढ़ाया गया है. साथ ही, को दिल्ली एनसीआर में डीजल जेनरेटर चलाने पर भी रोक लगाई गई है.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम अस्थायी राहत ही दे सकते हैं. जब तक पराली जलाने पर नियंत्रण और वाहनों के प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना मुश्किल है.
जाने माने पर्यावरणविद डॉ शरद गुप्ता का का मानना है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर दीर्घकालिक नीति बनाएं. किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करना इस दिशा में कारगर कदम हो सकते हैं.
आम जनता को भी अपनी भूमिका निभानी होगी, निजी वाहनों का कम उपयोग, वृक्षारोपण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाना प्रदूषण से बचाव का सबसे सरल रास्ता है.
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण अब सिर्फ मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक स्थायी संकट बन गया है. अगर तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र “रहने योग्य” नहीं रहेगा. स्वच्छ हवा का अधिकार हर नागरिक का है, और इसे बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी भी.
भारत एक्सप्रेस
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