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प्रोफेसर ने दी 16 लाख की फंडिंग…डॉक्टरों ने बनाए बम: लाल किला कार ब्लास्ट मामले में NIA ने दाखिल की चार्जशीट

Red Fort Blast Chargesheet: लाल किले के बाहर 10 नवंबर को हुए कार विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. जांच एजेंसी ने आरोप पत्र में दावा किया है कि फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय को देश विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की साजिश रची जा रही थी. चार्जशीट के मुताबिक इस कथित मॉड्यूल में विश्वविद्यालय से जुड़े तीन डॉक्टरों समेत कई लोग शामिल थे.

NIA के अनुसार आरोपी डॉक्टरों ने शुरुआत में विस्फोटक सामग्री तैयार करने और उसके परीक्षण की कोशिश की. इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर के आसपास और फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों के सुनसान इलाकों में कथित तौर पर विस्फोटकों का परीक्षण किया गया. जांच एजेंसी ने इन गतिविधियों में डॉक्टर उमर उन नबी, डॉक्टर मुजम्मिल शकील गनी, डॉक्टर अदील अहमद राथर और छात्र जासिर बिलाल वानी की भूमिका का उल्लेख किया है.

किराए के मकानों में छिपाकर रखी गई सामग्री

चार्जशीट में दावा किया गया है कि जांच से बचने के लिए मॉड्यूल से जुड़े लोगों ने फरीदाबाद के खोरी जमालपुर और धौज इलाके में किराए के मकानों का इस्तेमाल किया. NIA का कहना है कि इन जगहों पर कथित तौर पर रसायन, उपकरण और अन्य संदिग्ध सामग्री रखी जाती थी.

जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने गुरुग्राम और फरीदाबाद के स्थानीय बाजारों से अलग-अलग रसायन और अन्य सामान खरीदा. चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि मॉड्यूल से जुड़े लोगों ने विस्फोटक तैयार करने और उनके परीक्षण के लिए अलग-अलग स्थानों का इस्तेमाल किया.

प्रोफेसर पर फंडिंग में मदद का आरोप

NIA ने अल-फलाह विश्वविद्यालय के फार्माकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर शाहीन अहमद अंसारी की भूमिका का भी उल्लेख किया है. जांच एजेंसी का दावा है कि शाहीन ने कथित मॉड्यूल को आर्थिक मदद पहुंचाई. चार्जशीट में करीब 16 लाख रुपये की रकम का जिक्र किया गया है.

जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर हथियारों की खरीद और मॉड्यूल की अन्य गतिविधियों के लिए किया गया. चार्जशीट में धौज के जंगलों में हथियारों के परीक्षण का भी उल्लेख किया गया है.

लाल किले से पहले चांदनी चौक को बनाया था निशाना

लाल किला ब्लास्ट को लेकर NIA ने चार्जशीट में घटनाक्रम का भी विस्तार से जिक्र किया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, 10 नवंबर की शाम आरोपी उमर विस्फोटक से भरी कार लेकर लाल किले के आसपास पहुंचा था. एजेंसी का दावा है कि उसने पहले चांदनी चौक इलाके में एक स्थान पर कार खड़ी करने की कोशिश की, लेकिन वहां ट्रैफिक और पुलिस की मौजूदगी के कारण योजना बदल दी.

इसके बाद कार लाल किले की ओर ले जाई गई, जहां शाम करीब 6:50 बजे विस्फोट हुआ. इस घटना में कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे.

फॉरेंसिक जांच से हुई आरोपी की पहचान

NIA के मुताबिक, जांच के दौरान घटनास्थल से मिले सुरागों और फॉरेंसिक जांच के आधार पर उमर उन नबी की पहचान विस्फोट से जुड़े आरोपी के रूप में हुई. एजेंसी ने दावा किया है कि घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों का मिलान उमर के माता-पिता के डीएनए से किया गया, जिससे उसकी पहचान की पुष्टि हुई.

जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर से बरामद संदिग्ध सामग्री और फरीदाबाद से मिले रसायनों के बीच भी फॉरेंसिक समानता का दावा किया है. इसके अलावा, चार्जशीट में आरोपी के कमरे और वहां रखी सामग्री को लेकर भी कई अहम बातें कही गई हैं.

जांच में इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूतों का भी जिक्र

NIA ने चार्जशीट में बरामद डिजिटल दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है. एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई सामग्री में विस्फोटक तैयार करने से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. जांच में सामने आए इन तथ्यों के आधार पर NIA ने पूरे मामले में एक संगठित मॉड्यूल के सक्रिय होने का दावा किया है.

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हालांकि चार्जशीट में लगाए गए ये आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और अदालत में इनकी न्यायिक जांच होना बाकी है. मामले में आगे की सुनवाई के दौरान आरोपों और उपलब्ध सबूतों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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