देश

43 साल पुराने गैंगरेप केस में 3 आरोपी बरी, पीड़िता की गवाही पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

Allahabad High Court Gangrape Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़िता की गवाही के मूल्यांकन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही को अहम स्थान प्राप्त है, लेकिन उसे बिना जांचे-परखे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता. उसकी विश्वसनीयता, सच्चाई और मामले की परिस्थितियों के अनुरूप होने का आकलन करना जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फतेहपुर के 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन आरोपियों की दोषसिद्धि रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया. अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास, प्राथमिकी दर्ज कराने में छह दिन की देरी और गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विसंगतियों को फैसले का आधार बनाया.

1983 में दो महिलाओं से सामूहिक दुष्कर्म का था आरोप

मामला 17 अक्टूबर 1983 की रात का है. अभियोजन के अनुसार, फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में दो महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई थी. दोनों महिलाएं आपस में रिश्तेदार थीं. आरोप था कि चार नामजद आरोपी दो अन्य व्यक्तियों के साथ उनके घर में घुसे और तमंचा दिखाकर परिवार के सदस्यों को धमकाते हुए कथित वारदात को अंजाम दिया. घटना के छह दिन बाद, 23 अक्टूबर 1983 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने 22 अप्रैल 1985 को आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की.

प्राथमिकी में देरी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास

अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए. इनमें प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी, पीड़िताओं के बयानों में अंतर, घटना के समय पहने गए कपड़े पुलिस को उपलब्ध नहीं कराना और चिकित्सकीय साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि नहीं होना शामिल था. आरोपियों ने पुरानी रंजिश के कारण झूठा फंसाए जाने का दावा भी किया. हाईकोर्ट ने पाया कि शुरुआती शिकायत में दो कथित आरोपियों के नाम नहीं थे, जबकि बाद में उनकी भूमिका बताई गई. विवेचक ने भी अपने बयान में कहा कि पहली पीड़िता ने पूछताछ के दौरान उन दोनों के नाम नहीं बताए थे. इसके अलावा, दोनों महिलाओं के बयानों में घटना के क्रम, आरोपियों की भूमिका और परिवार के सदस्यों को रोकने के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण विसंगतियां थीं.

मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिलीं ताजा चोटें

अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान दोनों महिलाओं के शरीर पर कोई ताजा बाहरी या आंतरिक चोट नहीं मिली थी. घटना के समय पहने गए कपड़े भी पुलिस को नहीं सौंपे गए थे. हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल चोटों का न मिलना या चिकित्सकीय साक्ष्य से आरोप की पुष्टि नहीं होना, अपने आप में यौन अपराध के आरोप को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसी तरह, प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी भी अकेले अभियोजन के मामले को समाप्त नहीं करती. लेकिन इस मामले में देरी का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला और अन्य साक्ष्यों में भी गंभीर विसंगतियां थीं.

पीड़िता की गवाही पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने कहा कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद है, तो केवल उसी के आधार पर भी दोषसिद्धि की जा सकती है. इसके लिए हर मामले में अतिरिक्त पुष्टि आवश्यक नहीं होती. लेकिन जब मुख्य गवाहों के बयानों में ऐसे विरोधाभास हों, जो अभियोजन की मूल कहानी को प्रभावित करते हों, तो अदालत को सभी साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना चाहिए. इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा.

तीन आरोपियों की दोषसिद्धि रद्द

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सिराजुल, छोटेलाल और फक्कू की अपील स्वीकार कर उनकी दोषसिद्धि निरस्त कर दी और उन्हें बरी कर दिया. मुख्य आरोपी मोहम्मद अनीस खान की अपील उसकी मृत्यु के कारण 16 मार्च 2026 को ही समाप्त हो चुकी थी. अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण होती है, लेकिन न्यायिक निर्णय साक्ष्यों की विश्वसनीयता और पूरे मामले के निष्पक्ष मूल्यांकन के आधार पर लिया जाना चाहिए.

भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

Recent Posts

कार है या हथियारों का घर? खरगोन में मिले इतने हथियार कि चकरा जाएगा दिमाग

Khargone Illegal Weapons: खरगोन पुलिस ने कसरावद रोड पर कार से 14 अवैध देसी पिस्टल…

23 minutes ago

पटियाला में वर्दी की आड़ में कपल्स से वसूली का आरोप! 2 थानेदार गिरफ्तार, मोबाइल में मिलीं 90 वीडियो

Patiala Couple Blackmailing Case: पंजाब के पटियाला में कार में बैठे कपल्स की कथित तौर…

38 minutes ago

करोड़ो की खरीद में AI ने पकड़ी ऐसी धांधली! कचरा गाड़ी 6 लाख की, फिनाइल 33 हजार का; वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश में नगरीय प्रशासन विभाग की खरीदी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं. एसीएस…

42 minutes ago