43 साल पुराने गैंगरेप केस में 3 आरोपी बरी, पीड़िता की गवाही पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
Allahabad High Court Gangrape Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर के 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन आरोपियों की दोषसिद्धि रद्द कर उन्हें बरी कर दिया. अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास और FIR दर्ज कराने में छह दिन की देरी को अहम माना. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता और परिस्थितियों के अनुरूप होने का आकलन जरूरी है. मेडिकल साक्ष्य में चोट न मिलना या FIR में देरी अकेले आरोप खारिज करने का आधार नहीं हो सकता.
आजम खान को हाईकोर्ट से आंशिक राहत, याचिका संशोधन की मिली अनुमति, ट्रायल कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक 28 अगस्त तक बढ़ी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद आज़म खान को राहत देते हुए याचिका में संशोधन की अनुमति दी है. अब याचिका केवल गवाहों की दोबारा गवाही और वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में शामिल करने तक सीमित है.
स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, कहा– अस्पताल नहीं, शव विच्छेदन गृह बन चुका है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की बदहाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अस्पताल नहीं बल्कि शव विच्छेदन गृह बन गया है. कोर्ट ने मेडिकल माफिया, भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं पर गहरी नाराजगी जताई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए.
जेल में बंद महोबा के पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महोबा के पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार की जमानत अर्जी खारिज कर दी. उन पर व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी से रिश्वत मांगने, मानसिक प्रताड़ना देने और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप हैं.







