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Allahabad High Court news

Allahabad High Court Gangrape Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर के 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन आरोपियों की दोषसिद्धि रद्द कर उन्हें बरी कर दिया. अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास और FIR दर्ज कराने में छह दिन की देरी को अहम माना. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता और परिस्थितियों के अनुरूप होने का आकलन जरूरी है. मेडिकल साक्ष्य में चोट न मिलना या FIR में देरी अकेले आरोप खारिज करने का आधार नहीं हो सकता.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद आज़म खान को राहत देते हुए याचिका में संशोधन की अनुमति दी है. अब याचिका केवल गवाहों की दोबारा गवाही और वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में शामिल करने तक सीमित है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की बदहाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अस्पताल नहीं बल्कि शव विच्छेदन गृह बन गया है. कोर्ट ने मेडिकल माफिया, भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं पर गहरी नाराजगी जताई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महोबा के पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार की जमानत अर्जी खारिज कर दी. उन पर व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी से रिश्वत मांगने, मानसिक प्रताड़ना देने और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप हैं.