चन्द्र मोहन गुप्ता/अलवर
Alwar Nagar Nigam Corruption: राजस्थान के अलवर शहर का ऐतिहासिक सूचना केंद्र (Historical Information Center) आज सरकारी लापरवाही की वजह से बदहाल हो चुका है. अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत की वजह से , जिस जगह को सुंदर और घूमने लायक होना चाहिए था, वह अब कचरा गाड़ियों की पार्किंग बनकर रह गई है.
अफसरों की मिलीभगत से अलवर का ऐतिहासिक सूचना केंद्र आज कचरा गाड़ियों का अड्डा बन चुका है, जिससे वहां का पार्क और नेहरू जी की मूर्ति भी इसका शिकार हो गए है. वहीं दूसरी ओर, रसूखदारों और मैरिज होम मालिकों के दबाव में आकर प्रशासन ने कंपनी बाग के सामने बनने वाली चौपाटी योजना (Chowpatty Project) को भी रोक दिया है.
इससे स्थानीय जनता में भारी गुस्सा है और लोगों का आरोप है कि प्रशासन आम जनता के लिए नहीं सिर्फ ठेकेदारों और बड़े लोगों के फायदे के लिए काम कर रहा है.
सरकारी आयोजनों और राष्ट्रीय त्योहारों पर जिस सूचना केंद्र को प्रशासन द्वारा सजाया जाता है, वहीं अब कचरा उठाने वाली गाड़ियों के ठेकेदारों के निजी वाहन खुलेआम खड़े दिखाई देते हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है.
नियमों के अनुसार यहां केवल नगर निगम की अधिकृत गाड़ियां ही खड़ी हो सकती हैं, लेकिन वर्षों से निजी ठेकेदार सरकारी जमीन का उपयोग अपने फायदे के लिए कर रहे हैं.
पहले भी सूचना केंद्र के पास में बने एक मैरिज होम का उपयोग भी एक ठेकेदार के द्वारा अपने पर्सनल गाड़ियां खड़ी करने के लिए कई सालों तक बिना कोई पैसे दिए फ्री में उपयोग किया गया. बाद में जब अखबार में खबर आई तब जाकर ठेकेदार और अधिकारियों की मिली भगत सामने आई लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ.
लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सूचना केंद्र परिसर में बना पार्क और वहां लगी नेहरू जी की मूर्ति भी इसका शिकार हो गई है. कभी बच्चों और परिवारों के आकर्षण का केंद्र रहा यह स्थान अब कबाड़ और भारी वाहनों के बीच अपनी पहचान खोता जा रहा है.
स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी बाग के सामने प्रस्तावित चौपाटी परियोजना (Proposed Chowpatty Project) को कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में रोक दिया गया. लोगों का कहना है कि यह स्थान चौपाटी के लिए सबसे अच्छा था, लेकिन आसपास मौजूद मैरिज होम संचालकों को पार्किंग की समस्या होने के डर से आपत्तियां लगाई गईं और योजना रद्द कर दी गई.
लोगों का कहना है कि अलवर में विकास कार्य अब जनता की जरूरतों से ज्यादा ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से प्रभावित हो रहे हैं. सरकारी संपत्तियों पर बढ़ते निजी कब्जे और बच्चों के पार्कों की बदहाली प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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