Amit Shah-Akhilesh Yadav Debate: लोकसभा के विशेष सत्र में तीन ऐतिहासिक विधेयकों पर वोटिंग से ठीक पहले सदन का पारा तब चढ़ गया जब उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो दिग्गज गृह मंत्री अमित शाह और सपा प्रमुख अखिलेश यादव आमने-सामने आ गए. गाजियाबाद लोकसभा सीट के आंकड़ों को लेकर शुरू हुई यह बहस देखते ही देखते ‘परिसीमन’ की अनिवार्यता पर जाकर टिकी. अमित शाह ने आंकड़ों के जरिए यह समझाने की कोशिश की कि आखिर क्यों देश को अब बड़ी सीटों के विभाजन और नए परिसीमन की सख्त जरूरत है.
चर्चा के दौरान अमित शाह ने गाजियाबाद सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ लगभग 28 लाख वोटर्स हैं और यहाँ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सांसद रह चुके हैं. शाह के इतना कहते ही कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने उन्हें बीच में टोक दिया.
अखिलेश ने सवाल उठाया कि मंत्री जी जो आंकड़े बता रहे हैं, वे किस जनगणना (Census) के आधार पर हैं? अखिलेश का दावा था कि गाजियाबाद के जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे असलियत से बहुत कम हैं और आज की परिस्थिति में आबादी और वोटर्स की संख्या इससे दोगुनी हो सकती है.
अखिलेश यादव के टोकने पर अमित शाह ने मुस्कुराते हुए उन पर पलटवार किया. शाह ने कहा कि मैं भी तो यही कह रहा हूँ कि ये आंकड़े पुराने हैं. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अखिलेश जी को यह भी नहीं पता कि वह अपने स्टैंड के पक्ष में बात कर रहे हैं या विपक्ष में. अगर आप परिसीमन करने देंगे, तभी तो नया आंकड़ा आएगा और एक की जगह दो सीटें बनेंगी. जब तक आप पुरानी जनगणना पर अड़े रहेंगे, तब तक सही प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा?
गृह मंत्री ने परिसीमन बिल की वकालत करते हुए सदन के सामने कुछ चौंकाने वाले फैक्ट्स रखे. उन्होंने बताया कि देश में कई लोकसभा सीटें इतनी बड़ी हो चुकी हैं कि सांसद अपने सभी मतदाताओं तक पहुँच ही नहीं पाते. शाह ने डेटा पेश करते हुए कहा:
विशाल सीटें: देश में 127 सीटें ऐसी हैं जहाँ 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं.
अधिकतम आबादी: एक सीट पर तो 48 लाख से भी ज्यादा वोटर हैं.
प्रतिनिधित्व का संकट: शाह ने सवाल पूछा कि एक अकेला सांसद 39 लाख या 48 लाख वोटरों को कैसे संभालेगा और उनकी समस्याओं को संसद तक कैसे पहुँचाएगा?
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अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान इसीलिए रखा गया है ताकि लोकतंत्र में जनता का प्रतिनिधित्व प्रभावी बना रहे. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आबादी बढ़ रही है और निर्वाचन क्षेत्रों का आकार भी, ऐसे में 850 सीटों का प्रस्ताव कोई राजनीतिक चाल नहीं बल्कि प्रशासनिक और लोकतांत्रिक जरूरत है. शाह के इस तर्क के बाद सदन में सत्ता पक्ष ने मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया, जबकि विपक्ष परिसीमन की टाइमिंग को लेकर अपनी शंकाएं जताता रहा.
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-भारत एक्सप्रेस
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