कैसे अमित शाह की 'चाणक्य नीति' ने विरोधियों को दी मात?
Amit Shah: साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए जबरदस्त वापसी की. मोदी 2.0 में अमित शाह को गृहमंत्री बनाया गया. इसके बाद ही ये चर्चाएं तेज हो गईं कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 पर केंद्र सरकार बड़ा निर्णय ले सकती है. धारा 370 पर चर्चाओं को देख विपक्ष के कई नेताओं ने गृहमंत्री को चेतावनी दी कि इससे छेड़छाड़ करना खतरनाक हो सकता है. वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि अगर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो घाटी में स्थिति विस्फोटक हो जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर धारा 370 हटाया गया तो जम्मू-कश्मीर में कोई तिरंगा उठाने वाला नहीं बचेगा. विपक्ष की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था. लेकिन 5 गस्त 2019 को अमित शाह ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस प्रावधान को निरस्त कर दिया.
संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता दावा करते थे कि धारा 370 हटने पर कश्मीर में खून की नदियां बहेंगी, लेकिन वहां पर शांति रही और एक पत्ता तक नहीं हिला. गृहमंत्री अमित शाह का यह बयान विपक्ष के लिए एक चेतावनी की तरह रहा. विपक्ष को पता तक नहीं चल पाया कि आखिर जिस हिंसा को लेकर पिछले 70 सालों से लोगों को डराया जाता रहा, वो सिर्फ एक मन का वहम था.
देश विरोधी गतिविधियों को लेकर विपक्ष का यह पैटर्न नक्सलवाद के मामले पर भी साफ दिखाई देता है. साल 2014 से पहले की सरकारें नक्सलवाद पर कठोर कदम उठाने से डरती रहीं. उन्हें डर था कि अगर वो ऐसा करते हैं तो इसका खामियाजा उन्हें चुनावों में ना उठाना पड़ जाए. लेकिन साल 2014 के बाद स्थितियां पूरी तरह बदल गईं. 2019 में केंद्र में गृहमंत्री के पद पर बैठने के बाद अमित शाह ने साल 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने का ऐलान किया.
केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को पूरी तरह कुचलने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ वार किया. जंगलों में रहकर भारत को थर्राने की साजिश रचने वाले नक्सलियों को खत्म करने के लिए उन्होंने सुरक्षाबलों के अधिकारों में बढ़ोतरी की. वहीं नक्सलियों को आर्थिक मोर्चों पर चोट देने के लिए केंद्र सरकार ने उनके वित्तीय स्रोतों पर चोट करना शुरू कर दिया.
सरकार के कड़े कदम को देख नक्सलियों में खलबली मच गई. सुरक्षाबलों की ताबड़तोड़ कार्रवाई, विश्वविद्यालयों और शहरों में रहकर नक्सलियों की मदद करने वाले ‘अर्बन नक्सल’ को कुचलने के लिए विशेष अभियान शुरू किया. इस कार्रवाई के दौरान कई ऐसे प्रोफेसरों को हिरासत में लिया गया, जिनपर नक्सलियों के साथ साठगांठ के आरोप लगते रहते थे.
टॉप लीडरशिप पर बढ़ता दबाव, संगठन के नेटवर्क को लगातार ध्वस्त करने और वित्तीय स्रोतों पर चोट ने नक्सलियों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया. यह सब सिर्फ एक व्यक्ति की सोच से संभव हो पाया और वो थे गृहमंत्री अमित शाह.
नक्सलियों पर कार्रवाई का प्रभाव जमीन पर भी दिखना शुरू हो चुका था. साल 2010 में जहां नक्सल हमलों की संख्या 1936 थी. वहीं 2024 में ये घटकर मात्र 374 रह गईं. इस अवधि में नागरिकों और सुरक्षाबलों की कुल मौतों का आकड़ा 1005 से घटकर 150 रह गया. यह सब संभव अमित शाह के दूरदर्शी सोच की वजह से हुआ.
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चाहे 370 पर फैसला लेना हो या नक्सलवाद को जड़ से खत्म करना हो, गृहमंत्री अमित शाह ताबड़तोड़ फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं. दोनों मामलों में परिस्थितियां अलग-अलग थीं, दुश्मन अलग-अलग थे, लेकिन उन्होंने अपनी चाणक्य नीति से दोनों मामलों को खत्म कर दिया. अब धारा 370 इतिहास बन चुका है और नक्सलियों की टॉप लीडरशिप खत्म हो चुकी है. विपक्ष की तरफ से लगातार गृहमंत्री अमित शाह को टारगेट करना सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है और अमित शाह दबाव की राजनीति को मात देकर सूरज की तरह चमकना जानते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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