भारत की सरहदों की तरफ आंख उठाने वालों के लिए एक बेहद बुरी खबर है! देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस वक्त अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पूरी तरह से सील करने के लिए ‘3 हफ्तों’ के एक बेहद आक्रामक और महत्वपूर्ण ‘मल्टी-स्टेट बॉर्डर सुरक्षा दौरे’ पर हैं. इस महा-दौरे का एकमात्र मकसद एक ऐसा ‘अभेद्य किला’ तैयार करना है, जिसे दुश्मन मुल्क सपने में भी न भेद सकें. राजस्थान के रेगिस्तान से लेकर गुजरात के दलदली ‘हरामी नाले’ तक, सुरक्षा का जो ब्लूप्रिंट तैयार हो रहा है, उसने सीमा पार भारी दहशत पैदा कर दी है.
बॉर्डर की सुरक्षा अब सिर्फ कंटीले तारों के भरोसे नहीं रहेगी. 27 मई (आज) अमित शाह सुरक्षा एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आला कमांडरों के साथ ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ की एक बेहद हाई-लेवल समीक्षा कर रहे हैं.
इस महत्वाकांक्षी और ‘गेमचेंजर’ प्रोजेक्ट के तहत पूरी सीमा को अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस किया जा रहा है. इसमें आसमान पर नजर रखने वाले सर्विलांस ड्रोन, आधुनिक रडार, रात के अंधेरे को चीरने वाले थर्मल कैमरे और ‘एंटी-ड्रोन सर्विलांस सिस्टम’ शामिल हैं. यानी अब अगर दुश्मन की कोई भी चालबाजी हुई, तो यह स्मार्ट ग्रिड उसे सेकंडों में नेस्तनाबूद कर देगा.
सीमा की असली ताकत वहां बसे ग्रामीण होते हैं. 26 मई को राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में ‘वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम-2’ (Vibrant Villages Program-2) का जोरदार शुभारंभ करने के बाद, आज (27 मई) गृह मंत्री इसके अगले चरणों का मास्टरप्लान तैयार कर रहे हैं. गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एक ऐसा सॉलिड रोडमैप बन रहा है, जिससे बॉर्डर के गांवों में चमचमाती सड़कें, 24 घंटे बिजली और रोजगार के बेतहाशा अवसर पैदा होंगे.
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राजस्थान में दुश्मनों के मंसूबों पर पानी फेरने के बाद, अमित शाह का अगला टारगेट गुजरात का बेहद खतरनाक और संवेदनशील इलाका है. 29 मई को गृह मंत्री भुज के कच्छ के रण और विवादित ‘हरामी नाला’ (Harami Nala) क्षेत्र का दौरा करेंगे. यह वह दलदली इलाका है जहां से घुसपैठ की सबसे ज्यादा कोशिशें होती हैं. इस खौफनाक दौरे से ठीक पहले, आज (27 मई) दिल्ली में सभी सुरक्षा समन्वयकों (Security Coordinators) के साथ एक सीक्रेट और रणनीतिक मीटिंग हो रही है, ताकि घुसपैठ-विरोधी ऑपरेशन को इतना ‘फुल-प्रूफ’ बनाया जा सके कि सीमा पर परिंदा भी पर न मार सके.
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