MLA Chirri Balaraju Cyber Fraud: हाल के दिनों में साइबर फ्रॉड के अनेकों मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें साइबर अपराधियों के झांसे में आकर लोगों ने अपना नुकसान करा लिया. लेकिन इस बार साइबर लुटेरों ने एक विधायक जी को ही अपना शिकार बना लिया.
साइबर फ्रॉड के लुटेरों के झांसे में आकर आंध्र प्रदेश के एक विधायक जी को 12 लाख का नुकसान हो गया. साइबर अपराधियों ने चालान के नाम पर विधायक को चूना लगा दिया. मामला सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई में जुट गई है.
यह मामला आंध्र प्रदेश के पोलावरम का है. जहां के विधायक चिर्री बलाराजू को व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया. मैसेज में रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के चालान के नाम पर एक लिंक भेजा गया था. जानकारी के अनुसार जैसे ही विधायक जी ने लिंक पर क्लिक किया, उनके अकाउंट से पैसे ट्रांसफर हो गए. पैसे निकाले जाने का मैसेज आने के बाद विधायक चिर्री बलाराजू को एहसास हुआ कि वो भी साइबर फ्रॉड के शिकार हो गए.
जिसके बाद विधायक ने जीलुगुमिली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है. फिलहाल पुलिस आरोपी का पता लगाने के लिए जांच में लगी हुई है.
आंध्र प्रदेश में किसी विधायक को ठगने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले, पिछले साल अक्टूबर में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के एक विधायक कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले में 1.07 करोड़ रुपए गंवा बैठे थे. साइबर अपराधियों ने वाईएसआर कडप्पा जिले के मैदुकर से विधायक पुट्टा सुधाकर यादव को ठग लिया था. हैदराबाद में रहने वाले विधायक को जब अहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है, तो उन्होंने हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
ठगों ने विधायक को मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के एक मनगढ़ंत मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी थी. उन्होंने विधायक को अंतरिम जमानत दिलाने के बहाने पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया. साइबर अपराधियों ने विधायक को बताया कि मुंबई साइबर क्राइम पुलिस ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 17 शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके नाम पर बैंक अकाउंट खोलने के लिए उनके आधार और सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है.
विधायक के मुताबिक, साइबर क्राइम जांच अधिकारी बनकर एक ठग ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर भी बात की. इस दौरान एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट और सीबीआई का अकाउंट फ्रीज करने का आदेश दिखाया. गिरफ्तारी की धमकी मिलने के बाद विधायक ने अंतरिम जमानत पाने के लिए एक हफ्ते में 9 ट्रांजैक्शन के जरिए 1.07 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए.
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इसके बाद, जब ठगों ने कोर्ट से क्लीन चिट दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपए और मांगे, तो विधायक को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया.
-भारत एक्सप्रेस
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