देश

बंगाल में BJP के आते ही खत्म हुआ मंदिरों का ‘वनवास’! आसनसोल में खुले दुर्गा टेंपल के कपाट तो क्या बोले लोग?

Bengal election result impact: पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए ‘महा-परिवर्तन’ का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. आसनसोल के बस्तिन बाजार इलाके में आज एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक क्षण देखने को मिला, जिसे देख किसी की भी आंखें नम हो जाएं. दशकों से विवादों और ‘वोट बैंक’ की राजनीति की वजह से बंद पड़े ‘श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट’ के मंदिर के द्वार आज हमेशा के लिए खोल दिए गए. सालों बाद मंदिर के कपाट खुलते ही पूरा इलाका ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा और भक्त खुशी के मारे झूमने लगे.

दीदी के जाते ही बदल गया माहौल?(Bengal election result impact)

बस्तिन बाजार का यह प्राचीन दुर्गा मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह मंदिर राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक जटिलताओं की भेंट चढ़ा हुआ था. मंदिर (Asansol Durga Temple) पर लगे तालों का आलम यह था कि साल के 365 दिनों में से केवल दो बार (दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा) ही पट खोले जाते थे. बाकी के दिन श्रद्धालु मंदिर के गेट पर ही मत्था टेककर लौटने को मजबूर थे. स्थानीय लोगों का आरोप था कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण उनकी आस्था को दबाया जा रहा था.

कृष्णेंदु मुखर्जी: वादे से जीत और जीत से कपाट तक

बता दें कि पश्चिम बर्धमान जिले की सभी 9 सीटों पर बीजेपी ने परचम लहराया है. आसनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान संकल्प लिया था कि जीत के बाद वे इस मंदिर को ‘राजनीति के ताले’ से आजाद कराएंगे.

4 मई के नतीजों के बाद कृष्णेंदु ने अपना वादा निभाया. वे सीधे मंदिर पहुंचे, विधिवत पूजा-अर्चना की और अपने हाथों से मंदिर के कपाट खोल दिए. विधायक ने साफ किया कि अब यह मंदिर साल के 365 दिन भक्तों के लिए खुला रहेगा.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो(Asansol Durga Temple)

जैसे ही मंदिर के पट खुले, वहां मौजूद महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों से आंसू छलक पड़े. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भक्त शंख बजाते, ढाक पीटते और एक-दूसरे को गले लगाते दिख रहे हैं. वीडियो देखकर नेटिजन्स लिख रहे हैं कि यह बंगाल में सनातन की नई सुबह है. लोगों का कहना है कि यह केवल एक मंदिर का खुलना नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की बहाली है.

ये भी पढ़ें- ‘BJP जीती तो कपड़े उतार कर घूमूंगा’! सूफियान भाई का दावा पड़ा उल्टा…TMC की हार के बाद तलाश में निकला सोशल मीडिया

आस्था के साथ बहेगी विकास की धारा

मंदिर के नियमित रूप से खुलने से न केवल धार्मिक माहौल बदला है, बल्कि स्थानीय छोटे कारोबारियों में भी उम्मीद जगी है. मंदिर के आसपास फूल-माला, प्रसाद और फल की दुकानों पर रौनक वापस लौट आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तिन बाजार में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सालों बाद खुले इस मंदिर ने संदेश दिया है कि बंगाल अब भय और विवादों से निकलकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर वापस लौट रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

Recent Posts

Pitru Paksha Rules: पितृ पक्ष में न करें अन्न की बर्बादी, जानिए 10 अक्टूबर तक किन बातों का रखना है ध्यान

पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर से हो चुकी है. इस दौरान पितरों की…

7 minutes ago

दौड़ रहा है गंगा एक्सप्रेसवे! उन्नाव के एक रैंप को छोड़ कहीं जलभराव नहीं, प्रोजेक्ट मैनेजर ने दी जानकारी

देश भर में जारी भारी और असामान्य मानसूनी बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे पूरी तरह…

41 minutes ago

India’s First LNG Train Launch: अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए क्या है इस डुअल-फ्यूल ट्रेन की खासियत

India First LNG Train: हाइड्रोजन के बाद अब भारतीय रेलवे देश की पहली LNG-डीजल ट्रेन…

1 hour ago

सबक नहीं सीखा क्या… UNGA के मंच से रूस ने जर्मनी को क्यों याद दिलाया दूसरा विश्व युद्ध?

Russia Germany Clash: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूस और जर्मनी आमने-सामने आ गए हैं.…

2 hours ago

UP से लेकर छत्तीसगढ़ और बिहार तक…14 राज्यों में मचा हाहाकार, क्या है ये राक्षसी ‘Cyclone Arnab’?

Cyclone Arnab Kya Hai: बंगाल की खाड़ी से उठे मौसमी सिस्टम ‘अर्नब’ के असर से…

2 hours ago

UPSC Recruitment 2026: केंद्र सरकार में अफसर बनने का बड़ा मौका, 13 स्पेशलिस्ट पदों पर निकली भर्ती

UPSC Recruitment 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन में…

2 hours ago