Ashutosh Brahmachari U-turn on Shankaracharya Avimukteshwaranand: प्रयागराज/नगमा फातिमा: सनातन धर्म और संतों की सर्वोच्च पीठ से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में इस वक्त का सबसे बड़ा और सनसनीखेज यू-टर्न सामने आया है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज पर बटुकों के यौन शोषण (पोक्सो एक्ट) का गंभीर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी अब अपने ही बयान से पूरी तरह पलट गए हैं.
आशुतोष ब्रह्मचारी ने एक चौंकाने वाला वीडियो जारी कर सरेआम कबूल किया है कि उन्होंने शंकराचार्य के खिलाफ जो भी मुकदमा दायर कराया था, वह पूरी तरह फर्जी और एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था. इस कबूलनामे के बाद देश के धार्मिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है.
आशुतोष ब्रह्मचारी ने वीडियो में साफ-साफ कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद को बदनाम करने और उन्हें जेल भेजने का यह पूरा ताना-बाना रामचंद्र दास उर्फ जय मिश्रा के कहने पर बुना गया था. आशुतोष ने इस पूरे षड्यंत्र को बेनकाब करने के लिए कई डिजिटल साक्ष्य, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड्स भी सार्वजनिक किए हैं. इन चैट्स से साफ पता चलता है कि किस तरह एक सोची-समझी रणनीति के तहत थाना स्तर पर पोक्सो एक्ट के तहत तहरीर (शिकायत) देने का दबाव बनाया जा रहा था.
सार्वजनिक किए गए व्हाट्सएप संदेशों में जो खुलासे हुए हैं, वे न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक सुचिता पर भी बड़े सवाल खड़े करते हैं. चैट्स में कथित रूप से लिखा है “नहीं आप तहरीर थाना जाकर दो”, “मैं फोन कराऊंगा” और “अवनीश अवस्थी जी से बात करता हूं”.
इन संदेशों से प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि शंकराचार्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू कराने के लिए प्रशासनिक और पुलिस के बड़े अधिकारियों के नामों का इस्तेमाल किया जा रहा था और उन तक पहुंच का दावा किया जा रहा था. आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि विभिन्न आश्रमों और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन पर अवैध कब्जा करने के उद्देश्य से संतों को हटाने का यह खेल खेला जा रहा था.
अपने इस बड़े यू-टर्न और आत्मग्लानि के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने उत्तर प्रदेश शासन, यूपी पुलिस और सक्षम जांच एजेंसियों से हाथ जोड़कर निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि ये व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड्स जांच में सत्यापित पाए जाते हैं, तो यह न्याय व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है. आशुतोष ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अब किसी को पूर्वाग्रह से दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि उस गहरे षड्यंत्र, दबाव और झूठे मुकदमे की सच्चाई को जनता के सामने लाना है जिसके जाल में फंसाकर संतों को बदनाम करने की कोशिश की गई थी.
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