रिपोर्टर-आनन्द मिश्रा
Balrampur cattle smuggling racket busted: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में पुलिस ने पशु तस्करी के एक संगठित और बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है. रघुनाथनगर क्षेत्र में सक्रिय इस गिरोह के खिलाफ पुलिस ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए अब तक 4 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है.
यह कार्रवाई केवल सड़क पर मवेशी पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस ने इस पूरे गोरखधंधे के पीछे चल रहे मनी ट्रांजैक्शन और डिजिटल नेटवर्किंग के सुराग भी जुटा लिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई सफेदपोश चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.
पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि रघुनाथनगर और बलंगी चौकी क्षेत्र का इस्तेमाल मवेशियों की अवैध तस्करी के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर के रूप में किया जा रहा है. विश्वसनीय मुखबिर की सटीक सूचना पर एसडीओपी वाड्रफनगर के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने देर रात बलंगी चौकी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से घेराबंदी की.
इस दौरान संदिग्ध वाहनों को रुकने का इशारा किया गया, तो तस्करों ने भागने की कोशिश की लेकिन मुस्तैद पुलिस बल ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ तस्कर भागने में सफल रहे, लेकिन पुलिस ने मौके से एक मुख्य कड़ी को दबोच लिया.
इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल पशुओं से लदे वाहन जब्त किए, बल्कि तस्करी के आधुनिक तौर-तरीकों का भी खुलासा किया. पुलिस ने मौके से 2 पिकअप वाहन और एक महंगी ग्रैंड विटारा कार जब्त की है. जांच में पता चला कि ग्रैंड विटारा कार का इस्तेमाल तस्करी के वाहनों को ‘पायलटिंग’ देने और पुलिस की लोकेशन ट्रैक करने के लिए किया जा रहा था. दोनों पिकअप वाहनों में क्रूरतापूर्वक 7-7 मवेशी लोड किए गए थे, जिन्हें अवैध रूप से राज्य की सीमा से बाहर ले जाने की तैयारी थी. जब्त वाहनों और मवेशियों की कीमत लाखों में आंकी जा रही है.
पकड़े गए आरोपी से कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने इस संगठित गिरोह के अन्य सदस्यों तक अपनी पहुंच बनाई. अब तक इस मामले में जितेंद्र जायसवाल, मानिकचंद सोनवानी, दीपक सोनवानी और देवमती सोनवानी को गिरफ्तार किया जा चुका है.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्य आरोपी जितेंद्र जायसवाल कोई नया खिलाड़ी नहीं है. वह पहले भी कई बार पशु तस्करी के संगीन मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है. आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और अन्य प्रभावी कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है.
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बलरामपुर पुलिस इस मामले को महज एक साधारण पशु तस्करी के रूप में नहीं देख रही है. जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह बाकायदा व्हाट्सएप ग्रुप्स और ऑनलाइन मनी ट्रांजैक्शन के जरिए अपना नेटवर्क चला रहा था. मवेशियों की खरीद-बिक्री से लेकर उनके परिवहन तक का पूरा हिसाब-किताब डिजिटल तरीके से मैनेज किया जा रहा था.
पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और कॉल डिटेल्स व बैंक खातों के जरिए इस तस्करी सिंडिकेट की आखिरी कड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. अफसरों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े हर छोटे-बड़े अपराधी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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