Urdu Conclave 2026

बेनकाब हुआ ईरान! जंग की आग में झोंके बच्चे; कितने सुरक्षित बाल अधिकार? उड़ी UN कन्वेंशन की धज्जियां

Iran Child Recruitment Controversy: बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाले ईरान ने आखिर क्यों अपने ही बच्चों को युद्ध की आग में झोंक दिया है? पढ़िए अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाते ईरान के इस सबसे बड़े पाखंड की इनसाइड स्टोरी

Iran Child Recruitment Controversy

Iran Child Recruitment Controversy: जब बात दूसरों पर उंगली उठाने की होती है, तो ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे ऊंची आवाज में बोलता है. इस जंग की शुरुआत से ही ईरान ने विरोधी देशों पर ‘वार क्राइम’ (War Crime) का आरोप लगाया, स्कूलों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और दुनिया भर से इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताकर कार्रवाई की मांग की. लेकिन जब बात अपने ही घर की आई, तो ईरान के सारे आदर्श हवा हो गए.

12 साल के बच्चे बने सैनिक (children rights in iran)

जिस ईरान ने बाल अधिकारों पर ‘संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ (Convention on the Rights of the Child) पर बड़े गर्व से हस्ताक्षर किए थे, आज वही देश 12 साल के मासूम बच्चों को युद्ध की आग में धकेल रहा है. UN का यह कन्वेंशन साफ तौर पर सैन्य गतिविधियों में बच्चों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाता है. लेकिन ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाते हुए युद्ध और सुरक्षा कार्यों के लिए न्यूनतम आयु सीमा घटाकर 12 वर्ष कर दी है.

स्कूल बैग की जगह थमा दी सबमशीन गन (iran human rights violation)

ईरान सरकार इसे ‘मातृभूमि रक्षक’ या वॉलंटियर प्रोग्राम का नाम देकर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत रोंगटे खड़े करने वाली है. जिन 12-13 साल के बच्चों के हाथों में किताबें और स्कूल बैग होना चाहिए था, वे आज राजधानी तेहरान की सड़कों पर मशीनगन ताने खड़े हैं. स्थानीय लोगों ने खुद पुष्टि की है कि इन मासूमों को चेकपॉइंट्स पर वाहनों की जांच करने और हथियारों के साथ पहरा देने का काम सौंपा गया है.

अधिकारों का हनन या तबाही की तैयारी? (iran military child recruitment)

IRGC के अधिकारी रहीम नदाली का तर्क है कि बच्चे खुद युद्ध में शामिल होना चाहते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या एक 12 साल का बच्चा युद्ध की विभीषिका और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को समझता है? दुनिया को मानवाधिकारों और वॉर क्राइम पर ज्ञान देने वाला ईरान आज खुद इस बात का उदाहरण बन गया है कि उसके राज में बच्चों के अधिकार कितने सुरक्षित हैं. अपने 10 लाख लड़ाकों की फौज के बीच इन छोटे बच्चों को ढाल बनाकर खड़ा करना, ईरान के दोहरे चरित्र को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब करता है.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read