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बिहार में 36 की कैबिनेट में 35 फुल: सम्राट चौधरी ने किसके लिए रखी 1 खाली कुर्सी? जानें 4 सियासी मायने

Samrat Chaudhary Cabinet Strategy: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार की एनडीए सरकार का मंत्रिमंडल अब लगभग पूरी तरह से आकार ले चुका है. पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद सत्ता के गलियारों में अब एक नए सवाल ने जन्म ले लिया है. संविधान के नियमों के अनुसार बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनमें से 35 कुर्सियां अब भर चुकी हैं. ऐसे में सियासी पंडितों और आम जनता के बीच सबसे बड़ी चर्चा यही है कि आखिर वह 1 खाली कुर्सी किसके लिए बचाकर रखी गई है?

राजनीति में कोई भी फैसला बिना किसी मकसद के नहीं होता, खासकर जब बात ‘कुर्सी’ की हो. आइए समझते हैं कि इस 1 खाली सीट के पीछे का पूरा राजनीतिक गणित और रणनीति क्या है?

36 की ही क्यों हो सकती है कैबिनेट? (Bihar Samrat Chaudhary Cabinet Calculation)

किसी भी राज्य में मंत्रियों की अधिकतम संख्या तय करने के लिए एक संवैधानिक नियम है. 91वें संविधान संशोधन के अनुसार, किसी भी राज्य के मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती.

बिहार विधानसभा का गणित

  • विधानसभा की कुल सीटें- 243
  • अधिकतम मंत्री (15% के नियम से)- 36.45 (यानी अधिकतम 36)
  • मौजूदा कैबिनेट में भरे गए पद- 35 (मुख्यमंत्री+डिप्टी सीएम+अन्य मंत्री)
  • खाली बची सीट- 1

एक खाली कुर्सी के 4 सियासी मायने (NDA Strategy For Samrat Chaudhary Cabinet)

भले ही यह सिर्फ एक सीट हो, लेकिन सत्ता के समीकरणों में इस एक खाली कुर्सी का वजन 35 भरी हुई कुर्सियों के बराबर माना जा रहा है. इसके पीछे निम्नलिखित राजनीतिक रणनीतियां छिपी हैं.

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1- नाराज विधायकों के लिए ‘उम्मीद की किरण’

कैबिनेट विस्तार के दौरान कई कद्दावर नेताओं और पुराने मंत्रियों का पत्ता कटा है, तो कई ऐसे विधायक हैं जिन्हें मंत्री न बन पाने का मलाल है. राजनीति में इस खाली सीट को ‘डैमेज कंट्रोल’ के हथियार के तौर पर देखा जाता है. यह एक सीट उन नाराज विधायकों के लिए एक ‘उम्मीद’ की तरह काम करेगी, जिससे वे बगावत करने के बजाय भविष्य में मंत्री बनने की आस में पार्टी के प्रति वफादार बने रहेंगे.

2- गठबंधन के भीतर किसी नए ‘साथी’ की गुंजाइश

बिहार की राजनीति हमेशा से चौंकाने वाली रही है. भविष्य में अगर कोई निर्दलीय विधायक, किसी छोटे दल का नेता या फिर विपक्षी खेमे से कोई बड़ा चेहरा पाला बदलकर एनडीए के साथ आता है, तो उसे इनाम के तौर पर यह खाली सीट दी जा सकती है. यह भविष्य के राजनीतिक उलटफेर के लिए छोड़ा गया एक ‘बैकअप प्लान’ है.

3- मुख्यमंत्री का रणनीतिक ‘वीटो’

आमतौर पर हर मुख्यमंत्री अपने पास एक या दो सीटें खाली रखना पसंद करता है. इससे उन्हें कैबिनेट में फेरबदल करने की पूरी स्वतंत्रता मिलती है. अगर आने वाले समय में किसी मंत्री का प्रदर्शन खराब रहता है या कोई विवाद खड़ा होता है, तो मुख्यमंत्री बिना किसी संवैधानिक संकट के उस एक खाली पद का इस्तेमाल कर नए व्यक्ति को कैबिनेट में ला सकते हैं.

4- पार्टी अध्यक्ष के लिए स्कोप

यह खाली सीट जातीय संतुलन को साधने और आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए छोड़ी गई है. चर्चा है कि यह सीट नितिन नबीन के कोटे या कायस्थ कोटे के किसी अन्य नेता के लिए या फिर गठबंधन में जातीय समीकरण को और मजबूत करने के उद्देश्य से खाली रखी गई है. क्योंकि, नितिन नबीन की सीट से जाहिर तौर पर कोई उनका करीबी ही आएगा. ऐसे में इस सीट से आने वाले विधायक को मंत्री बनाकर कायस्थ लोगों को साधा जा सकता है.

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सोची-समझी राजनीतिक मायने की है 1 सीट

सियासत में एक पुरानी कहावत है कि “जो दिखता है, उससे कहीं ज्यादा वो होता है जो छिपा लिया जाता है.” 36 की कैबिनेट में जानबूझकर 35 का आंकड़ा छूना और 1 सीट को खाली छोड़ देना कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक बेहद सोची-समझी राजनीतिक चाल है. यह 1 सीट अब एनडीए सरकार के लिए एक ‘तुरुप के इक्के’ का काम करेगी, जिसे सही समय आने पर चला जाएगा.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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