Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जबरदस्त उठा-पठक के बीच धीरे-धीरे अपनी तय तारीख की ओर बढ़ रहा है. 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न होगा, जिसकी मतगणना 14 नवंबर को होगी. राज्य भर में राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो रही हैं और पार्टियां सीट-बंटवारे और उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बैठकें कर रही हैं. कुछ मामलों में औपचारिक सीट-बंटवारे के समझौते से पहले ही उम्मीदवारों को पार्टी के चुनाव चिन्ह वितरित कर दिए गए हैं.
जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने गठबंधन को अंतिम रूप दे दिया है, दोनों दलों के बीच 101-101 सीटों के बंटवारे की घोषणा की है. इसके अलावा एनडीए की अन्य सहयोगी दलों में चिराग की LJP (R) को 29, जीतनराम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की RLM को 6-6 सीटें दी गई है.
वहीं महागठबंधन ने अब तक अपने सीट बंटवारे को लेकर कोई भी घोषणा नहीं की है. सोमवार (13 अक्टूबर) को दिल्ली में घटक दलों की बैठक के बाद उम्मीद की जा रही थी कि औपचारिक रूप से सीट शेयरिंग का ऐलान हो जाएगा.
इन सब के बीच सेोमवार को ही खबर आई की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर बेहद नाराज हैं और जीती सीट दूसरे दलों से फिर से वापस लिए जाने को कहा है.
पिछले 20 सालों से भी अधिक समय से बिहार की राजनीति के एक ध्रुव नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का प्रभुत्व अब भी बना हुआ है. सुशासन बाबू के नाम नौ बार बिहार के मुख्यमंत्री को तौर पर शपथ लेने का रिकॉर्ड है. उनका पहला कार्यकाल 2000 में शुरू हुआ था और उनका सबसे हालिया कार्यकाल एनडीए में फिर से शामिल होने के बाद जनवरी 2024 में समाप्त हुआ.
वर्तमान कार्यकाल नीतीश का मुख्यमंत्री के रूप में नौवां कार्यकाल है. पिछले कुछ सालो में उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) दोनों के साथ गठबंधन वाली सरकारों में सीएम रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि कई बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद नीतीश कुमार ने अपने किसी भी कार्यकाल में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और न ही जीता है. इसके बजाय वे बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं. आखिरी बार उन्होंने 1995 में विधानसभा चुनाव जीता था, जब उन्होंने नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने जनता पार्टी के विश्व मोहन चौधरी को हराया था.
इससे पहले उन्होंने 1985 के बिहार विधानसभा चुनाव में लोकदल के टिकट पर हरनौत निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और कांग्रेस उम्मीदवार विरजनंदन प्रसाद सिंह को हराकर विजयी हुए थे.
नीतीश कुमार ने लगातार पांच बार – 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999 बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे. हालांकि, परिसीमन के बाद बाढ़ लोकसभा क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त हो गया. 2004 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने दो सीटों, बाढ़ और नालंदा, से चुनाव लड़ा. हालांकि बाढ़ में तो वे हार गए, लेकिन नालंदा में उन्हें जीत मिली.
बड़ा सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. विधान परिषद हमेशा से उनके लिए एक सुरक्षित रास्ता रहा है, लेकिन इस बार भी वे सीधे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का जोखिम उठाने से हिचकिचा सकते हैं. इसके अलावा एनडीए ने अभी तक उन्हें आधिकारिक तौर पर बिहार में अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. अपनी बढ़ती उम्र और लंबे, शानदार राजनीतिक करियर को देखते हुए, नीतीश को शायद दोबारा चुनावी मैदान में उतरना न तो ज़रूरी लगता है और न ही रणनीतिक रूप से समझदारी भरा.
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-भारत एक्सप्रेस
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