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Bihar Election 2025: महागठबंधन में सीट बंटवारा अंतिम दौर में, बढ़ती खींचतान और असंतोष के बीच संभावनाओं की राजनीति

बिहार चुनाव 2025 के महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल और अन्य सहयोगी) में सीट बंटवारे का अंतिम दौर चल रहा है. वीआईपी और लोजपा में असहमति और डिप्टी सीएम पद के ऑफर के बीच गठबंधन की रणनीति पर नजर बनी हुई है.

Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है. विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल और अन्य सहयोगी) में सीटों के बंटवारे को लेकर गहन मंथन अब फाइनल दौर में है. सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन में अब तक जो फॉर्मूला उभरकर सामने आया है, वह आरजेडी को 135, कांग्रेस को 60, वाम दलों को 29 और वीआईपी, लोजपा (पशुपति पारस गुट) और जेएमएम को मिलाकर करीब 18-19 सीटों के इर्द-गिर्द है. हालांकि इस बंटवारे को लेकर अंदरूनी असहमत भी साफ दिखाई दे रही है.

आरजेडी की ‘बड़ी पार्टी’ की रणनीति

महागठबंधन के सबसे बड़े दल के रूप में आरजेडी अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना चाहती है. यही वजह है कि पार्टी 135 से कम सीटों पर समझौता करने को तैयार नहीं दिख रही है. आरजेडी की रणनीति साफ है. वह छोटे दलों को अपने हिस्से से समायोजित कर आगे एक ‘डोमिनेंट पार्टी’ की भूमिका में रहना चाहती है. लेकिन यह भी स्पष्ट है कि वह किसी भी सहयोगी को इतनी जगह नहीं देना चाहती जिससे भविष्य में उसकी नेतृत्व भूमिका चुनौती में पड़े.

कांग्रेस की दोहरी स्थिति

कांग्रेस, जो पिछले कई वर्षों से बिहार में क्षेत्रीय दलों के सहारे चुनाव लड़ती रही है, इस बार थोड़ा आक्रामक रुख अपनाए हुए है. पार्टी 60 से 61 सीटों से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग मानता है कि अब पार्टी को आरजेडी की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करनी चाहिए.

मुकेश सहनी और डिप्टी सीएम की पेशकश

वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी इस बार भी सीट बंटवारे को लेकर असंतुष्ट नजर आ रहे हैं. हालांकि उन्हें डिप्टी सीएम पद का “गैर-आधिकारिक” प्रलोभन दिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले में उन्हें कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश हो रही है. ये ‘ऑफर-के-बदले-सहमति’ की रणनीति क्या रंग लाएगी, यह आने वाला समय बताएगा.

पशुपति पारस की संभावित ‘अलग राह’

एक और लोजपा पशुपति पारस महागठबंधन से नाराज होकर अलग राह पकड़ सकते हैं. हालांकि उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं. लेफ्ट पार्टियों को 29 सीटें दी जा रही हैं और इस हिस्से में कोई कटौती नहीं की जा रही. यह एक रणनीतिक फैसला माना जा सकता है, क्योंकि लेफ्ट ने पिछले चुनाव में सीमित संसाधनों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया था और आरजेडी को कई सीटों पर सीधी टक्कर से राहत दी थी.

कांग्रेस हाई कमान की तरफ से प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को फ्री हैंड दिया गया है और पीछे न हटाने की बात भी की गई है इसी वजह से कांग्रेस पार्टी इस बार झुकने को तैयार नहीं है और चाहती है कि जहां पर पार्टी मजबूत है, संगठन खड़ा हुआ है उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ा जाए. ना की 2020 की तरह 70 सीटें लेकर 19 पर ही जीत दर्ज कर सके. जिससे पार्टी का स्ट्राइक रेट खराब हो और अन्य सहयोगी दल सरकार ना बनने पर उसे दोषी ठहराए.

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-भारत एक्सप्रेस



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