Bihar Liquor Ban Reality: बेगुसराय/रविशंकर शर्मा: बिहार के बेगूसराय जिले से शराबबंदी के दावों की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. यहाँ बछवाड़ा थाना क्षेत्र के सिसवा गांव स्थित एक प्राथमिक विद्यालय उस वक्त रणक्षेत्र बन गया, जब स्कूल से लौटकर एक मासूम बच्चा नशे की हालत में घर पहुँचा. इस घटना ने न केवल शिक्षा के मंदिर की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्कूल परिसर के भीतर ही चल रहे शराब के ‘काले खेल’ का भी भंडाफोड़ कर दिया है.
सिसवा गांव के रहने वाले रिजवाना खातून का बेटा जब स्कूल से घर लौटा, तो उसके कदम लड़खड़ा रहे थे और मुँह से शराब की तेज दुर्गंध आ रही थी. बच्चे की हालत देख परिजन दंग रह गए. जब उसके दोस्तों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि स्कूल के पीछे बंद पड़े शौचालय के पास कुछ ‘रंगीन बोतलें’ रखी थीं, जिन्हें बच्चे ने कौतूहलवश पी लिया.
परिजनों ने तुरंत स्कूल पहुँचकर प्रधानाध्यापक मोहम्मद मुर्शाली को मामले की जानकारी दी. जब ग्रामीण और स्कूल स्टाफ परिसर के पूर्वी हिस्से में स्थित जर्जर और बंद पड़े शौचालय के पास पहुँचे, तो वहां का नजारा देख सबकी आंखें फटी रह गईं. शौचालय के भीतर भारी मात्रा में विदेशी शराब की पेटियाँ छिपाकर रखी गई थीं. स्कूल का शौचालय बच्चों की सुविधा के बजाय शराब माफियाओं का सुरक्षित गोदाम बना हुआ था.
सूचना मिलते ही बछवाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और जर्जर शौचालय की घेराबंदी कर तलाशी ली. थानाध्यक्ष परेंद्र कुमार के नेतृत्व में की गई छापेमारी में वहां से लगभग 25 पेटियाँ विदेशी शराब बरामद की गईं. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि स्कूल की चहारदीवारी के भीतर इतनी बड़ी खेप किसके इशारे पर और कब से रखी जा रही थी.
नशे की हालत में मिले छात्र को तुरंत स्थानीय डॉक्टरों के पास ले जाया गया. उपचार के बाद उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है. हालांकि, स्कूल जैसी जगह पर शराब की उपलब्धता ने अभिभावकों के मन में गहरा डर और आक्रोश पैदा कर दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि माफियाओं ने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सरकारी स्कूल के जर्जर भवनों का चुनाव किया है.
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बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन स्कूल के भीतर से शराब की इतनी बड़ी खेप मिलना और एक छात्र का नशे में धुत होना प्रशासन की चौकसी पर बड़ा तमाचा है. प्रधानाध्यापक का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या स्कूल प्रबंधन और स्थानीय चौकीदार को भनक तक नहीं लगी?
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