Rabri Devi Bungalow: बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन चुकी है और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार बैठे हैं. सरकार गठन को अभी कुछ ही समय हुआ है, लेकिन फैसलों की चर्चा हर तरफ होने लगी है. इनमें सबसे ज्यादा सुर्खियों में है राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड का बंगला खाली करने का आदेश.
करीब 20 सालों से 10, सर्कुलर रोड का बंगला लालू परिवार का ठिकाना रहा है. यही से राजनीति की रणनीतियां बनती थीं और यही बंगला राजद का पॉलिटिकल नर्व सेंटर माना जाता था. अब नीतीश सरकार ने इस बंगले को वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है. राबड़ी देवी को विपक्ष की लीडर के तौर पर एक नया आवास अलॉट कर दिया गया है.
नीतीश कुमार ने पिछले 25 सालों में कई बार एनडीए और महागठबंधन के साथ सरकार बनाई है. लेकिन इससे पहले कभी राबड़ी देवी के आवास पर असर नहीं पड़ा. इस बार हालात अलग हैं. विधानसभा चुनावों के बाद बीजेपी कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभरी है और इसका असर सरकार के फैसलों में साफ दिख रहा है.
यह पहली बार नहीं है जब लालू परिवार को बंगला खाली करने का आदेश मिला हो. 2017 में भी तेजस्वी यादव को 5, देशरत्न मार्ग का बंगला छोड़ना पड़ा था. उस समय उन्होंने हाईकोर्ट का सहारा लिया था, लेकिन राहत नहीं मिली. कोर्ट ने साफ कहा था कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगला और सुविधाएं वापस ली जाएं.
राबड़ी देवी को नोटिस मिलने के बाद लालू परिवार एकजुट नजर आ रहा है. रोहिणी आचार्या और तेजप्रताप यादव ने नीतीश कुमार को घेरा है. तेजप्रताप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “छोटे भाई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई के बंगले को खाली करने का आदेश दे दिया.” उन्होंने कहा कि इस घर से राजद कार्यकर्ताओं का भावुक रिश्ता जुड़ा था और अब यह रिश्ता एक सरकारी नोटिस में खत्म हो गया है.
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बिहार की राजनीति में बंगले का यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि नीतीश और लालू परिवार के रिश्तों में दूरी का प्रतीक भी बन गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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