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कैडर वाली पार्टी में दलबदलू! सिर्फ ‘शुभेंदु’ नहीं… RJD, कांग्रेस और TMC से आए इन 5 नेताओं को भी BJP ने बनाया मुख्यमंत्री

BJP Chief Ministers List: अक्सर कहा जाता है कि बीजेपी एक ‘कैडर-बेस्ड’ पार्टी है जो केवल अपने पुराने और वफादार (RSS पृष्ठभूमि वाले) कार्यकर्ताओं को ही सत्ता के शिखर पर बैठाती है. लेकिन यह पूरा सच नहीं है. बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही एक ऐसा राजनीतिक ‘सीक्रेट’ खुलकर सामने आया है, जिसने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है. देश में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 6 ऐसे धाकड़ मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना सियासी ककहरा कांग्रेस, TMC और RJD जैसी धुर विरोधी पार्टियों में सीखा था, लेकिन आज वो बीजेपी के तख्त पर राज कर रहे हैं.

शुभेंदु अधिकारी देश के ऐसे छठे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने अपना राजनीतिक सफर किसी अन्य पार्टी (TMC) से शुरू किया, लेकिन बीजेपी में शामिल (leaders who joined bjp) होकर न सिर्फ पार्टी का विश्वास जीता, बल्कि सत्ता के शीर्ष यानी ‘मुख्यमंत्री’ की कुर्सी तक पहुंचे. बीजेपी की यह रणनीति इस बात का सबूत है कि पार्टी में विनेबिलिटी को पुरानी वफादारी के बराबर ही तवज्जो दी जा रही है. आइए एक नजर डालते हैं उन 6 नेताओं पर, जो दूसरे दलों से आए और बीजेपी के लिए सत्ता के ‘सारथी’ बन गए.

शुभेंदु अधिकारी (पश्चिम बंगाल)

इस क्लब में सबसे नया और सबसे बड़ा नाम शुभेंदु अधिकारी का है. 2020 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा. 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम जैसी हॉटसीट से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पटखनी देकर ‘जायंट किलर’ का तमगा हासिल किया. 2026 में बंगाल में बीजेपी को पहली बार पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और अब पार्टी ने उन्हें प्रदेश का पहला मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा इनाम दिया है.

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हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma congress to bjp)

असम और पूरे पूर्वोत्तर में बीजेपी को स्थापित करने वाले हिमंता बिस्वा सरमा कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे. राहुल गांधी और कांग्रेस आलाकमान से मतभेदों के बाद 2015 में बीजेपी में शामिल हुए. 2021 में सर्बानंद सोनोवाल की जगह पार्टी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाया. 2026 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है और उनका दूसरी बार मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है.

सम्राट चौधरी (rjd to bjp political)

बिहार की जटिल जातीय राजनीति में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे सम्राट चौधरी भी दूसरे दल की ही उपज हैं. 2017 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) छोड़कर बीजेपी का दामन थामा. उनकी आक्रामक राजनीति को देखते हुए पार्टी ने उन्हें 2024 में पहली बार बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम बनाया. 2025 में भी वे इसी पद पर बरकरार रहे. 2026 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बीजेपी ने उन्हें अपना पहला पूर्णकालिक मुख्यमंत्री बनाकर बिहार की सत्ता सौंप दी है.

पेमा खांडू (Pema Khandu joined bjp)

अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में स्थायित्व लाने वाले पेमा खांडू का राजनीतिक सफर भी दलबदल की दिलचस्प कहानी है. 2016 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में गए और फिर उसी साल बीजेपी में शामिल होकर मुख्यमंत्री बन गए. 2019 में वे सीधे बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बने और हाल ही में 2024 के चुनावों में जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार राज्य की कमान संभाल रहे हैं.

माणिक साहा (Manik Saha bjp leadership)

त्रिपुरा में कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता माणिक साहा ने बीजेपी के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है. 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के खेमे में आए. 2022 में जब बिप्लब देब को अचानक इस्तीफा देना पड़ा, तो पार्टी ने साहा के साफ-सुथरे चेहरे पर दांव खेला और उन्हें CM बनाया. उनके नेतृत्व में 2023 के चुनावों में बीजेपी ने फिर से बहुमत हासिल किया और वे दूसरी बार मुख्यमंत्री बने.

युमनाम खेमचंद सिंह (मणिपुर)

मणिपुर की सियासत में भी बीजेपी ने दूसरे दल से आए नेता पर अपना भरोसा जताया है. 2017 में कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी के साथ आए. 2017 से 2020 तक वे बीजेपी सरकार में मंत्री रहे और संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई. 2026 के ताज़ा राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद पार्टी ने उन्हें मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता की चाबी सौंप दी है.

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बीजेपी की रणनीति (bjp expansion strategy)

इन 6 मुख्यमंत्रियों का ट्रैक रिकॉर्ड स्पष्ट करता है कि बीजेपी का आलाकमान अब ‘बाहरी बनाम भीतरी’ की बहस से बहुत आगे निकल चुका है. अगर किसी नेता में मास अपील (Mass Appeal), चुनाव जिताने का माद्दा और पार्टी के वैचारिक सांचे में ढलने की क्षमता है, तो बीजेपी उसे सर्वोच्च पद सौंपने से गुरेज नहीं करती. शुभेंदु अधिकारी से लेकर सम्राट चौधरी तक की ताजपोशी इस बात का सटीक उदाहरण है कि बीजेपी का ‘कमल’ अब उन हाथों में भी महफूज है, जिन्होंने सियासत का ‘ककहरा’ किसी और स्कूल में सीखा था.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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