8 फरवरी 2025 को इतिहास रचा गया. 26 वर्षों के बाद, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत दिलाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रगतिशील, सर्वसमावेशी और सुशासन मॉडल ने न केवल आम आदमी पार्टी (आप) को पराजित किया, बल्कि कांग्रेस, जिसने आप के पहले 15 वर्षों तक दिल्ली पर शासन किया था, की भी 70 में से 67 सीटों पर जमानत जब्त हो गई. कभी देश की सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली पार्टी रही कांग्रेस अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है.
भारत की स्वतंत्रता और प्रारंभिक शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कांग्रेस को महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस और कई अन्य महान नेताओं के नेतृत्व का सौभाग्य प्राप्त हुआ था. लेकिन समय के साथ यह एक पारिवारिक पार्टी बनकर रह गई. एक नवोदित राष्ट्र के रूप में भारत आत्मनिर्भर बनने की आकांक्षा रखता था, लेकिन यह कभी संभव नहीं हो सका. उस समय की गलत आर्थिक नीतियों, लाइसेंस राज और संरचनात्मक अक्षमताओं के कारण आर्थिक वृद्धि रुकी रही, जिसे ‘हिंदू विकास दर’ कहा गया. यह शब्द अपमानजनक और भ्रामक था क्योंकि धीमी वृद्धि का कारण अत्यधिक सरकारी नियंत्रण था, न कि कोई सांस्कृतिक या धार्मिक पहलू. दुर्भाग्यवश, किसी भी कांग्रेस नेता ने इस अनुचित लेबलिंग की आलोचना नहीं की.
1966 में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी सत्ता में आईं. वे भारत की सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में से एक मानी जाती हैं, लेकिन उनके नाम से सबसे पहले आपातकाल, नागरिक स्वतंत्रता का निलंबन, प्रेस सेंसरशिप और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी याद आती है. उस दौरान व्यापक मानवाधिकार हनन, झुग्गियों का विध्वंस और जबरन नसबंदी जैसे कठोर कदम उठाए गए. उनकी सरकार एक सशक्त संस्था के बजाय अधिनायकवादी शासन बन गई, जहां भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे. उस समय सोशल मीडिया नहीं था, इसलिए मीडिया पर उनकी सख्ती पूर्ण रूप से प्रभावी रही. कई विपक्षी सरकारों को बर्खास्त कर दिया गया.
इसके बाद, देश ने ध्रुवीकरण, घोटालों और दंगों के कई गंभीर घटनाक्रम देखे. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) II सरकार (2009-2014) नीति निर्धारण में निष्क्रियता, बड़े घोटालों (2जी, कोलगेट, कॉमनवेल्थ गेम्स), महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण न रख पाने के लिए जानी गई. कार्यकाल समाप्त होते-होते, सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में डूब चुकी थी. सत्ता विरोधी लहर अपने चरम पर थी. वहीं, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शानदार रिकॉर्ड और भाजपा के संगठित चुनाव अभियान ने 2014 के आम चुनावों में पार्टी को ऐतिहासिक जनादेश दिलाया.
प्रधानमंत्री मोदी की असाधारण सफलता एक दिन में हासिल नहीं हुई. यह उनके कठोर परिश्रम, दीर्घकालिक दृष्टि और सक्रिय शासन का परिणाम है. उनके कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था, शासन और वैश्विक स्थिति को नया रूप मिला है. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में से एक थी. भारत जैसे विशाल देश में इसका सुचारु क्रियान्वयन अद्भुत था और इसे विश्व की प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक अध्ययन विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए.
कुछ वर्षों पहले तक, कौन सोच सकता था कि 1.4 अरब लोगों की नकद-आधारित अर्थव्यवस्था डिजिटल भुगतान को इतनी तेजी से अपनाएगी? दरअसल, भारत के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद में यूपीआई के विचार का मजाक उड़ाते हुए यह प्रश्न उठाया था कि गांवों में बैंक, इंटरनेट और बिजली की उपलब्धता ही नहीं है. लेकिन हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने इस असंभव लगने वाले लक्ष्य को प्राप्त कर दिखाया.
राम मंदिर आंदोलन दशकों से हिंदुत्व राजनीति के केंद्र में रहा है. प्रधानमंत्री की कुशलता ने आस्था, कानून और राजनीति के बीच संतुलन स्थापित किया, जिससे इस जटिल मामले का समाधान हुआ और अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई.
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं ने मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण किया, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाया, लाखों रोजगार के अवसर उत्पन्न किए, निर्यात को बढ़ावा दिया और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित किया. भारतीयों ने पहले कभी इतनी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास महसूस नहीं किया था. वर्तमान सरकार की गरीबों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण यह है कि 2014 से अब तक 400 अरब डॉलर विभिन्न योजनाओं में खर्च किए गए हैं, जिनका लाभ करोड़ों गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों को मिला है. इतनी विशाल स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन और संसाधनों का निष्पक्ष वितरण किसी भी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए.
यह केंद्र सरकार की सकारात्मक दृष्टिकोण का ही परिणाम था कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति बिना किसी बड़े विरोध के सफलतापूर्वक संपन्न हुई. ईमानदार नीयत, कानूनी विशेषज्ञता और सुरक्षा व्यवस्था के सही संयोजन ने इसे संभव बनाया, जबकि कुछ स्वार्थी नेताओं और अलगाववादी समूहों ने इसका विरोध किया था.
सार्वजनिक कल्याण की दिशा में सरकार ने आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य सेवा, महामारी प्रबंधन, विदेश नीति, सस्ती बीमा योजनाएँ, किसानों की भलाई, महिला सशक्तिकरण, आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए हैं. इस सरकार ने परिवारवाद से हटकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति को अपनाया है. गणतंत्र बनने के 75 वर्षों बाद, भारत अब तेजी से विकास की राह पर है, और यह यात्रा यहीं नहीं रुकेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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