एनडीए ने उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice Presidential Election) के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जिससे तमाम अटकलों पर विराम लग गया है. राधाकृष्णन का चयन सिर्फ एक नाम की घोषणा नहीं बल्कि दक्षिण भारत में बीजेपी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है.
सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) तमिलनाडु के कोयंबटूर से आते हैं और गाउंडर यानी ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. अगले साल तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी ने उनके नाम का ऐलान कर बड़ा दांव खेला है. पार्टी की कोशिश है कि वह तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करे जहां अब तक उसे निर्णायक सफलता नहीं मिली है.
राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) दो बार सांसद रह चुके हैं, झारखंड के राज्यपाल भी रहे हैं और फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. संघ से उनका गहरा जुड़ाव है, जो बीजेपी के लिए एक मजबूत कड़ी साबित हो सकता है. दक्षिण भारत में बीजेपी ने कर्नाटक और तेलंगाना में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है लेकिन तमिलनाडु और केरल में उसे अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है.
तमिलनाडु में बीजेपी ने AIADMK और छोटे दलों के साथ गठबंधन कर अपनी पैठ बनाने की कोशिश की लेकिन अब तक उसे बड़ी सफलता नहीं मिली. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 11.24 प्रतिशत वोट मिले जो 2019 के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत ज्यादा हैं. हालांकि सीटों के मामले में उसका खाता नहीं खुला.
2026 का विधानसभा चुनाव तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम है. डीएमके सत्ता बचाने की कोशिश करेगी जबकि बीजेपी और AIADMK वापसी की राह तलाशेंगे. तमिल अस्मिता, द्रविड़वाद और हिंदी विरोध जैसी भावनाएं बीजेपी के लिए चुनौती हैं लेकिन जातिगत समीकरणों और विकास के मुद्दों के जरिए वह अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है.
सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) का नाम इसी रणनीति का हिस्सा है. बीजेपी दक्षिण में पैठ बढ़ाने की एक कोशिश कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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