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कैसे होगी जातिगत जनगणना? राहुल-खरगे ने मौजूदा प्रश्नावलि को बताया ‘खानापूर्ति’, जानें पीएम मोदी को पत्र भेज क्या-क्या कहा

देश के अलग-अलग हिस्सों में आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर सड़कों पर हो रहे जोरदार प्रदर्शनों और उठती मांगों के बीच, जातिगत जनगणना को लेकर देश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है. एक तरफ जहां पिछड़ा, दलित और अति-पिछड़ा वर्ग अपनी वास्तविक आबादी के हक के लिए सड़कों पर उतरा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ 1931 के बाद से अब तक देश में विस्तृत जातिगत आंकड़े दर्ज न होने का ऐतिहासिक घाव भी अब राजनीतिक रूप से उभरकर सामने आ गया है.

तकरीबन 95 सालों से देश में वास्तविक जातिगत आंकड़े न होने के कारण नीतियां और आरक्षण का दायरा हवा में होने के आरोप लगते रहे हैं. इसी बैकड्रॉप में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की मौजूदा गणना प्रक्रिया के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है.

खरगे और राहुल का पीएम मोदी को पत्र

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 21 पेज का एक बेहद तीखा पत्र भेजा है. विपक्ष ने सरकार की मौजूदा प्रश्नावली को महज एक ‘खानापूर्ति’ और जनता को ‘गुमराह करने वाली’ प्रक्रिया करार दिया है.

विपक्ष का आरोप है कि सरकार जिस ‘ओपन-एंडेड’ तरीके से जाति का डेटा जुटाने की कोशिश कर रही है, उससे देश में एक ही जाति हजारों अलग-अलग उपनामों, स्थानीय बोलियों और बोलचाल के शब्दों में बंट जाएगी. इसका सीधा नतीजा यह होगा कि जुटाया गया पूरा डेटा व्यावहारिक रूप से अनुपयोगी हो जाएगा.

OBC को उलझाने की साजिश का आरोप

पत्र में दोनों शीर्ष नेताओं ने कहा कि इस व्यवस्था से देश की विशाल अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आबादी का वास्तविक आकार कभी सामने आ ही नहीं पाएगा. प्रक्रिया में ‘Backward Class’ यानी पिछड़ा वर्ग जैसे स्पष्ट शब्द तक को गायब रखने पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया है कि अगर सटीक आंकड़े ही नहीं होंगे, तो सामाजिक न्याय, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की नीतियां पूरी तरह से निष्प्रभावी हो जाएंगी.

क्या है तेलंगाना-बिहार मॉडल और ‘ड्रॉप-डाउन’ लिस्ट?

इस पत्र के जरिए विपक्ष ने सुझाव देते हुए मांग की है कि SC/ST की तर्ज पर जातियों की एक प्रमाणित ‘ड्रॉप-डाउन लिस्ट’ तैयार की जाए, जैसा कि बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षणों में सफलतापूर्वक किया गया था. कांग्रेस नेताओं ने दोनों राज्यों की सूचियों की प्रतियां भी प्रधानमंत्री को भेजी हैं.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह प्रधानमंत्री को लिखा गया तीसरा पत्र है, लेकिन अब तक एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया गया है. विपक्ष ने मांग की है कि मौजूदा प्रक्रिया तुरंत रद्द कर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर नई प्रश्नावली तैयार की जाए.

यह भी पढ़ें: ‘सुखबीर बादल के रहते गठबंधन मुमकिन नहीं!’ भाजपा नेता अमनजोत कौर का बड़ा बयान, अकाली दल पर साधा निशाना

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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