भारतीय सिनेमा में इन दिनों आध्यात्म और भक्ति से जुड़ी कहानियों को दर्शकों का अच्छा साथ मिल रहा है. इसी कड़ी में 2026 की हिंदी फिल्म ‘हनुमान अंश’ चर्चा में है. विशाल चतुर्वेदी के लेखन और निर्देशन में बनी यह फिल्म संत नीब करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित है. भक्त उन्हें महाराज जी, नीम करौली बाबा या करौली बाबा के नाम से भी जानते हैं और कई श्रद्धालु उन्हें हनुमान जी का अंश मानते हैं.
फिल्म को सिर्फ किसी संत की जीवन-कथा के तौर पर देखना शायद इसके मकसद को छोटा कर देगा. कहानी असल में उस सफर को सामने लाती है, जिसमें एक इंसान ईश्वर की तलाश करते-करते सेवा और करुणा को ही अपनी साधना बना लेता है.
कहानी 20वीं सदी की शुरुआत के आसपास ब्रज क्षेत्र से शुरू होती है. 13 साल का लक्ष्मीनारायण, जिसे आगे चलकर लक्ष्मण दास के नाम से जाना जाता है, अपनी मां के निधन से गहरे सदमे में है. उसके मन में एक ही सवाल है कि अगर भगवान मिल जाएं, तो शायद वह अपनी मां से फिर मिल सके.
इसी तलाश में वह घर छोड़ देता है. इसके बाद शुरू होती है मंदिरों, जंगलों, नदियों और गांवों के बीच भटकने की एक लंबी यात्रा. वह धीरे-धीरे सांसारिक मोह से दूर होता जाता है और मौन, अनुशासन तथा भक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बना लेता है.
लेकिन इस यात्रा में उसे एक बड़ा आध्यात्मिक बोध होता है. ईश्वर को पाने का रास्ता दुनिया से भागने में नहीं, बल्कि लोगों के बीच रहकर उनकी मदद करने में है. इसके बाद भूखे को भोजन कराना, हर इंसान से बिना भेदभाव प्रेम करना और जरूरतमंद की मदद करना उसकी साधना का हिस्सा बन जाता है.
नीम करौली बाबा से जुड़ी कई चमत्कारों और आशीर्वाद की कहानियां भक्तों के बीच प्रचलित रही हैं. फिल्म में भी ऐसी घटनाओं का उल्लेख आता है, लेकिन कहानी का मुख्य जोर चमत्कारों पर नहीं बल्कि बाबा के व्यवहार और उनकी सेवा-भावना पर है.
ऐसी ही एक चर्चित घटना में उन्हें ट्रेन से उतार दिया जाता है. इसके बाद उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि उस जगह रेलवे स्टेशन बनेगा. बाद में वहां नीम करौली स्टेशन बना और इसी घटना से उनके नाम के साथ ‘नीम करौली’ जुड़ने की बात कही जाती है.
फिल्म का केंद्रीय संदेश बाबा की उस सीख के आसपास घूमता है, जिसे उनके अनुयायी आज भी याद करते हैं—सबसे प्रेम करो, सेवा करो, जरूरतमंद को खाना खिलाओ और राम का नाम जपो.
नीम करौली बाबा का जन्म करीब 1900 के आसपास बताया जाता है. उनका नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा बताया जाता है. वे हनुमान जी के अनन्य भक्त थे. उनके अनुयायियों में कई लोग उन्हें हनुमान जी का अंश या आंशिक अवतार मानते रहे हैं.
उत्तराखंड का कैंची धाम उनके नाम से जुड़े सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थलों में से एक है. बाबा ने कई हनुमान मंदिरों के निर्माण में योगदान दिया और उनकी शिक्षाओं का प्रभाव भारत से बाहर तक पहुंचा.
उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसे अंतरराष्ट्रीय चर्चित नाम उनके आश्रम या उनकी शिक्षाओं से प्रभावित रहे हैं. हालांकि बाबा ने खुद को अवतार बताने का दावा नहीं किया. उनकी सीख में दिखावा कम और सेवा, प्रेम तथा विनम्रता पर जोर ज्यादा था. यहां तक कि वे भक्तों से अपने पैर छूने के बजाय हनुमान जी के चरणों में श्रद्धा रखने की बात कहते थे.
‘हनुमान अंश’ की खासियत यही है कि यह सिर्फ पुराने समय की आध्यात्मिक घटनाओं को पर्दे पर उतारने की कोशिश नहीं करती. फिल्म यह सवाल भी उठाती है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान को सुकून आखिर कहां मिल सकता है. बाबा की सीख का जवाब सीधा है कि दूसरों के काम आना, भूखे को खाना देना, बिना भेदभाव प्रेम करना और ईश्वर का स्मरण करना. शायद यही वजह है कि उनकी बातें आज भी लोगों को आसानी से जुड़ी हुई महसूस होती हैं.
फिल्म की कहानी भी इसी सरल विचार को सामने रखती है कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. किसी जरूरतमंद की मदद करना और बिना किसी स्वार्थ के इंसान के काम आना भी अपने आप में एक बड़ी साधना हो सकती है.
डॉक्टर विशाल चतुर्वेदी नीब करौरी बाबा की जीवनी सिल्वर स्क्रीन पर उतारना चाहते थे. इसलिए उन्होंने रिसर्च शुरू की. ओम लवानिया ‘प्रोफेसर’ लिखते हैं –
2009 में रिसर्च शुरू हुई, 2017 तक आते आते व्यवस्थित कहानियां शेप लेने गई. फिर 2023 में रिसर्च का दायरा बढ़ाया गया. किताबें पढ़ी, वृंदावन, अकबरपुर, लखनऊ और नीम करौली की यात्राएं की. लोगों से बातचीत से डेटा तैयार किया.
स्क्रिप्ट तैयार हुई. विशाल ने कहानी को वेब सीरीज में लाने के लिए ओटीटी से संपर्क साधा. किंतु उन्हें बिग नो मिला क्योंकि ओटीटी संतों की कहानी में निवेश नहीं करना चाहता था. ओटीटी के रिजेक्शन के बाद विशाल ने ठान लिया था कि हर हाल में फ़िल्म बनायेंगे. आर्थिक समस्या आई. कई साल तक निवेश के लिए भटके, चूंकि फ़िल्म में बड़े कलाकार नहीं थे इसलिए कोई पैसा लगाने को तैयार नहीं था. आख़िरकार कुछ लोग मिले, जिन्होंने विशाल पर भरोसा किया.
विशाल चाहते थे कि महाराज जी के किरदार के लिए ऐसा चेहरा चाहिए था जिसकी पहले से कोई स्थापित स्टार-इमेज न हो और जिसके व्यक्तिगत आचरण से किरदार की गरिमा प्रभावित ना हो.
विशाल मानते है कि धार्मिक कंटेंट में सिर्फ़ रिसर्च पर्याप्त नहीं होती है. फिल्मकार को विषय के प्रति श्रद्धा और विश्वास भी होना चाहिए, क्योंकि दर्शकों की आस्था उससे जुड़ी होती है.
इसी वजह से उन्होंने कास्टिंग तक में अलग मानदंड अपनाया. कलाकार का अभिनय ही पर्याप्त नहीं था. उसका व्यवहार भी देखा गया.उसकी जीवन-शैली भी महत्वपूर्ण थी.किरदार की गरिमा को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखा गया. पूरा सेट शाकाहारी रखा गया, रोज आरती होती थी और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था.
और फिर प्रोडक्शन के दौरान एक वास्तविक संकट भी आया. जिस अभिनेता को मुख्य भूमिका के लिए चुना गया था, वह बीमार पड़ गया. तब फिल्म के सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव सत्य, जो प्रॉप्स आदि संभाल रहे थे, को मुख्य भूमिका दी गई.
हनुमान बाबा ने शोभिनव को चुना था. विशाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि वे बाबा की चमत्कारिक छवि से इतर बाबा की “लीलाओं”, मानवीय भावनाओं, कम्पैशन, सर्विस और सामाजिक परिवर्तन पर था.इसलिए इस सेगमेंट में निर्देशक विशाल का क्रिएटिविटी शानदार रही है.
तभी तो फ़िल्म धीरे धीरे लोगों से जुड़ रही है और बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा होल्ड कर रखा है.फ़िल्म ने अभी तक 12 करोड़ की कमाई कर ली.
विशाल बाबा की जीवनी को ट्राइलॉजी में उतारने वाले है.अर्थात् अभी दो भाग आयेंगे.भारतीय सिनेमा में सनातनी संतों की कहानी पर बहुत कम फोकस रहा है या कहे इग्नोर किए जाते है.विशाल के प्रयास के बाद उन फ़िल्म मेकर्स को हौसला मिलेगा, जिनके पास ऐसी कहानियाँ कहने को है या रिसर्च करके बैठे है.
हनुमान अंश अच्छी क्रिएटिव बायोपिक है.नीब करौरी बाबा की लीलाओं से समाज के परिवर्तन को दिखलाया है.
यह भी पढ़ें: ‘साहब, स्कूल जाने में…’ महोबा के बच्चों ने डीएम के दरबार में लगाई बदहाल सड़क की गुहार
-भारत एक्सप्रेस
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि मक्का की ओर बढ़ रहे…
IMD ने 16 सितंबर को दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत…
16 सितंबर 2026, बुधवार को भाद्रपद शुक्ल पंचमी के साथ स्कंद षष्ठी और बलराम जयंती…
16 सितंबर 2026 को चंद्रमा के वृश्चिक राशि में गोचर और ज्योतिषीय योगों के बीच…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक सेवा काल को पूरा करने के अवसर…
India Vs Afghanistan T20: भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ मंगलवार को अरुण जेटली स्टेडियम में…