भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम बनने के बाद अब सियासी गलियारों में अगली चर्चा केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल को लेकर है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार आने वाले समय में अपनी टीम में कुछ नए चेहरों को शामिल कर सकती है. खास तौर पर युवा नेताओं, महिला चेहरों और सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर रह सकता है. साथ ही उन मंत्रियों की जिम्मेदारियां भी बदली जा सकती हैं, जिनके पास एक से ज्यादा बड़े मंत्रालय हैं.
मौजूदा समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं. संविधान के मुताबिक मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं. यानी अभी 12 पद खाली हैं, जिन्हें सरकार जरूरत और राजनीतिक समीकरण के हिसाब से भर सकती है.
हालांकि यह बदलाव सिर्फ आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर होगा, ऐसा जरूरी नहीं है. सरकार के सामने प्रशासनिक कामकाज को बेहतर तरीके से बांटने की चुनौती भी है. अमित शाह के पास गृह के साथ सहकारिता मंत्रालय है. जेपी नड्डा स्वास्थ्य के अलावा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय संभाल रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान के पास कृषि और ग्रामीण विकास जैसे अहम विभाग हैं. इसी तरह अश्विनी वैष्णव रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं. ऐसे में कुछ जिम्मेदारियां दूसरे नेताओं को सौंपकर वरिष्ठ मंत्रियों का बोझ कम किया जा सकता है.
भाजपा में आम तौर पर एक व्यक्ति को एक ही प्रमुख जिम्मेदारी देने की परंपरा रही है. हाल के संगठनात्मक बदलावों ने भी मंत्रिपरिषद में संभावित बदलाव की चर्चा को हवा दी है. राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को क्रमशः दिल्ली और उत्तर प्रदेश भाजपा की जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे में सरकार में उनकी भूमिका को लेकर भी आगे बदलाव की संभावना पर नजर है.
पीयूष गोयल को पार्टी संगठन में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है. हालांकि माना जा रहा है कि उनकी मंत्री पद की जिम्मेदारी फिलहाल बनी रह सकती है.
कुछ मंत्रियों के राज्यसभा कार्यकाल की समाप्ति भी फेरबदल का एक कारण बन सकती है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का मौजूदा कार्यकाल नवंबर में खत्म होना है. इससे आगे की तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.
सरकार में कौन रहेगा और किसे नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसमें केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि उम्र और कामकाज भी अहम हो सकते हैं. 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय मंत्रिपरिषद में बड़ी संख्या 51 से 70 वर्ष की उम्र के नेताओं की थी. वहीं अब 70 वर्ष से अधिक उम्र के कई मंत्री सरकार में हैं.
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी, 81 वर्ष की उम्र में, मंत्रिपरिषद के सबसे उम्रदराज चेहरों में हैं. दूसरी ओर टीडीपी के 38 वर्षीय के. राम मोहन नायडू सरकार के सबसे युवा मंत्रियों में हैं. सूत्रों के मुताबिक आने वाले फेरबदल में युवाओं के साथ महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है.
संभावित फेरबदल में राज्यों का प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण हो सकता है. उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के साथ-साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक से नए चेहरों को मौका देने की चर्चा है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि गुजरात में भी चुनावी तैयारी का दौर शुरू होना है. ऐसे में इन राज्यों को मंत्रिपरिषद में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है.
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास अब 13 सांसद हैं. उनके बेटे श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित केंद्रीय मंत्री के तौर पर चर्चा में बताया जा रहा है.
पंजाब में आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए राज्यसभा सांसदों का समूह भी राजनीतिक रूप से अहम है. राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले इस समूह के सात सांसदों के भाजपा में आने के बाद पार्टी वहां अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इनमें संदीप पाठक को संगठन में सचिव की जिम्मेदारी मिल चुकी है. ऐसे में पंजाब से केंद्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी अटकलें बनी हुई हैं.
पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनडीए के समर्थन में आए सांसदों में से किसी को सरकार में जगह मिलने की संभावना पर चर्चा है. राज्य की राजनीति को देखते हुए यह कदम भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है.
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सहयोगी दलों की भूमिका पहले के मुकाबले ज्यादा अहम है. इसलिए मंत्रिपरिषद में किसी भी बदलाव के दौरान एनडीए के घटक दलों के साथ संतुलन साधना भी जरूरी होगा.
तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच डीएमके के एनडीए के करीब आने की अटकलें भी सामने आती रही हैं. महाराष्ट्र में एनसीपी को लेकर भी अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं. हालांकि इन संभावनाओं को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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