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थर्मल ड्रोन और AI से थमेगा हाथियों का टकराव, छत्तीसगढ़ के इस अनूठे मॉडल की मुरीद हुई अमेरिकी पत्रिका MIT

Chhattisgarh AI Elephant Conservation: लोकेश्वर सिन्हा/गरियाबंद :  छत्तीसगढ़ के गरियाबंद स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए एआई (AI), इंफ्रारेड थर्मल ड्रोन और ‘एलीफेंट अलर्ट ऐप’ का बेहतरीन इस्तेमाल किया जा रहा है. इस आधुनिक और रीयल-टाइम चेतावनी प्रणाली को अमेरिकी पत्रिका ‘MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू’ ने वैश्विक स्तर पर सराहा है, जो राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है.

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे आधुनिक प्रयासों को एक बड़ी वैश्विक कामयाबी मिली है. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की ‘AI आधारित हाथी संरक्षण पहल’ को अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू’ में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा और प्रकाशित किया गया है.

छत्तीसगढ़ की तकनीकी संरक्षण रणनीति को वैश्विक मंच (Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI)

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए अपनाई गई तकनीक को दुनिया भर में पहचान मिली है. अमेरिका की बेहद प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी पत्रिका ‘एमआईटी (MIT) टेक्नोलॉजी रिव्यू’ ने छत्तीसगढ़ की इस अनूठी एआई-आधारित हाथी संरक्षण पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. यह वैश्विक सराहना राज्य की तकनीक-आधारित वन्यजीव संरक्षण रणनीति की एक बड़ी सफलता को दर्शाती है.

एआई, थर्मल इमेजिंग और रीयल-टाइम वार्निंग सिस्टम की सराहना (Elephant Alert App Chhattisgarh)

इस तकनीकी प्रणाली के तहत उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इंफ्रारेड थर्मल सेंसर से लैस अत्याधुनिक ड्रोनों का उपयोग किया जा रहा है. अमेरिकी पत्रिका ने मानव और हाथियों के बीच टकराव को रोकने के लिए इस्तेमाल की जा रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), थर्मल इमेजिंग और रीयल-टाइम कम्युनिटी वार्निंग सिस्टम (त्वरित सामुदायिक चेतावनी प्रणाली) की जमकर तारीफ की है.

कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम? (MIT Technology Review wildlife)

इस सुरक्षा चक्र के केंद्र में ‘एलीफेंट अलर्ट ऐप’ (Elephant Alert App) और थर्मल ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली काम करती है. घने जंगलों में ड्रोन के जरिए जैसे ही हाथियों के मूवमेंट (आवाजाही) का पता चलता है, वैसे ही वहां तैनात प्रशिक्षित ऑपरेटर तुरंत सक्रिय हो जाते हैं. वे ‘एआई एलीफेंट अलर्ट ऐप’ के माध्यम से वन विभाग के अमले और प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को फौरन रीयल-टाइम अलर्ट भेज देते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान समय रहते टल जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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