Rambhadracharya Chitrakoot Tulsi Peeth Controversy: चित्रकूट/जियाउल हक: चित्रकूट के सुप्रसिद्ध तुलसी पीठ (Tulsi Peeth) से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे संत समाज और उत्तर प्रदेश प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है. श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष और विवादित संत आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने एक वीडियो जारी कर अपने ही गुरु, पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज की हत्या की साजिश रचे जाने का खौफनाक दावा किया है. उन्होंने इस कथित ‘मर्डर मिस्ट्री’ का सीधा आरोप पीठ के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास (जय महाराज) पर लगाया है.
बीते 6 जून को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में आशुतोष ब्रह्मचारी ने पीएम और सीएम से सीधे दखल की मांग करते हुए कई बड़े और गंभीर आरोप लगाए है.उन्होंने कहा कि अगर मेरे गुरुदेव रामभद्राचार्य महाराज की हत्या होती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसका सीधा जिम्मेदार रामचंद्र दास होगा. वह एक फ्रॉड है और उसने मेरे गुरु को कब्जे में ले रखा है. आशुतोष ने दावा किया कि रामचंद्र दास ने छोटे-छोटे बच्चों (बटुकों) और मालिश करने वालों के साथ कुकर्म किया है.
इतना ही नहीं आरोप है कि रामचंद्र गुरु की कथाओं का सारा पैसा इकट्ठा कर गुजरात में अपने भाई को भेजता है, जो वहां सोने का व्यापार करता है. इसके अलावा मथुरा में अवैध आश्रमों पर कब्जे और फर्जी वसीयत बनाने का भी दावा किया गया है.
इस सनसनीखेज वीडियो के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने अपनी चुप्पी तोड़ी और एक नया वीडियो जारी कर इस पूरे विवाद में एक ‘महा-ट्विस्ट’ ला दिया. मानसिक आघात से गुजर रहे रामभद्राचार्य ने अपने शिष्य आशुतोष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि ऐसा कौन सा शिष्य होगा जो अपने गुरु की हत्या के बारे में सोचे? मुझे तो ऐसा लगता है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ही मेरी हत्या कराने का षड्यंत्र रच रहा है.
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रामभद्राचार्य महाराज ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी और अपनी तुलसी पीठ की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है. उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी के इन आरोपों को उनकी और पीठ की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है. जगद्गुरु ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की सघन और निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो. फिलहाल, एक-दूसरे पर लग रहे इन संगीन आरोपों (जिसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है) ने चित्रकूट की शांति को भंग कर दिया है और अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं.
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