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CM विजय का नया फरमान या आजीविका पर वार? जानिए किस प्रोजेक्ट पर आमने-सामने आए मछुआरे

Pattinapakkam Fishermen Protest: चेन्नई का शांत तटीय इलाका पट्टिनापक्कम इस समय एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली तमिलनाडु सरकार द्वारा यहां ₹1,200 करोड़ का भव्य सचिवालय बनाने का आदेश जारी किए जाने के बाद से ही स्थानीय मछुआरा समुदाय में भारी आक्रोश है. अपनी आजीविका, दैनिक आजादी और बच्चों के भविष्य को खतरे में देखते हुए तटीय बस्तियों के लोग अब सरकार के इस फैसले के खिलाफ सीधे मैदान में उतर आए हैं.

चेन्नई के पट्टिनापक्कम में प्रस्तावित ₹1,200 करोड़ के सचिवालय कॉम्प्लेक्स का स्थानीय मछुआरा समुदाय कड़ा विरोध कर रहा है. मुख्यमंत्री विजय की सरकार द्वारा जारी इस आदेश के खिलाफ मछुआरों ने अपनी आजीविका और 20,000 बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए 21 सितंबर तक फैसला वापस न लेने पर पूरे राज्य में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है.

नए सचिवालय का ऐलान और तटीय बस्तियों में उबाल

तमिलनाडु प्रशासन ने हाल ही में चेन्नई के तटीय क्षेत्र पट्टिनापक्कम में लगभग ₹1,200 करोड़ की अनुमानित लागत से नए सरकारी सचिवालय कॉम्प्लेक्स के निर्माण का आदेश जारी किया. इस फैसले के सामने आते ही स्थानीय तटीय बस्तियों का सब्र टूट गया. पट्टिनापक्कम से लगे लगभग 10 से अधिक मछुआरा गांवों के प्रतिनिधियों ने एक आपात बैठक बुलाई और मुख्यमंत्री विजय की सरकार के इस कदम को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा हमला करार दिया.

सुरक्षा का पहरा और आजीविका पर मंडराता संकट

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में मुख्यमंत्री विजय की मौजूदगी और लगातार वीआईपी आवाजाही की वजह से उन्हें पहले से ही कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल झेलने पड़ते हैं. नोचीकुप्पम से लेकर मुल्ली कुप्पम तक फैले तटीय इलाकों के मछुआरों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों या वीआईपी मूवमेंट के दौरान मत्स्य पालन विभाग और स्थानीय पुलिस उन्हें समुद्र में जाने से रोकती है. उनका मानना है कि यदि यहां स्थायी रूप से सचिवालय बन जाता है, तो लगातार लगने वाली सुरक्षा पाबंदियां उनके मछली पकड़ने और बेचने के पारंपरिक अधिकार को हमेशा के लिए छीन लेंगी.

भविष्य की चिंता और सरकार को अल्टीमेटम

आजीविका के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट से आसपास के करीब 20,000 स्कूली बच्चों के भविष्य और सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई है. भारी निर्माण कार्य और प्रशासनिक वीआईपी रूट बनने से बच्चों की आवाजाही बाधित होगी. इसी के विरोध में मछुआरा संगठनों ने एक सुर में प्रेस वार्ता कर मुख्यमंत्री विजय की सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है: यदि 21 सितंबर तक सचिवालय निर्माण से जुड़ा सरकारी आदेश रद्द नहीं किया गया, तो वे पूरे राज्य में व्यापक चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन करेंगे.

यह भी पढ़ें-दो दिन पहले आया GF तृषा कृष्णन के साथ वीडियो, अब सीएम विजय को क्यों बुलाया गया लंदन से वापस?

-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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