Jharkhand MLA Land Issue: झारखंड की सियासत में ‘जमीन’ का मुद्दा हमेशा से ही गरमाया रहता है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है. राज्य के विधायकों और पूर्व विधायकों को सरकार की ओर से जमीन आवंटित किए जाने का जो प्रोजेक्ट था, वह अब ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है. इस पूरे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री चंदेश्वर प्रसाद (सीपी) सिंह ने इस पर मोर्चा खोल दिया है.
सीपी सिंह ने राज्य के आईएएस (IAS) अधिकारियों और कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले को अफसरों और सत्ताधारी दल ने जानबूझकर उलझाया है. जमीन आवंटन के लिए जो सहकारी समिति बनाई गई थी, सीपी सिंह उसके मुखिया भी हैं. भारत एक्सप्रेस से खास बातचीत में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं.
झारखंड के वरिष्ठ बीजेपी विधायक सीपी सिंह का गुस्सा सीधे तौर पर राज्य के नौकरशाहों यानी आईएएस अधिकारियों पर फूटा. उन्होंने कहा कि राज्य के प्रशासनिक अधिकारी खुद को नियम-कायदों से ऊपर समझने लगे हैं. सीपी सिंह के मुताबिक, विधायकों को जमीन देने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और नियमों के दायरे में थी, लेकिन कुछ अफसरों ने अपनी पसंद-नापसंद और राजनीतिक दबाव में आकर फाइलों को आगे बढ़ने ही नहीं दिया.
उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि जब बात अपनी सुविधाओं की आती है, तो ये अधिकारी तुरंत फाइलें पास कर लेते हैं, लेकिन जब जनप्रतिनिधियों के अधिकार की बात आती है, तो नियम-कानून का हवाला देकर मामले को लटका दिया जाता है. सिंह का कहना है कि अफसरों की इस ‘ओछी राजनीति’ की वजह से ही आज यह मामला अधर में लटका हुआ है.
सिर्फ अफसर ही नहीं, सीपी सिंह के निशाने पर कांग्रेस पार्टी भी रही. उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार में शामिल दल बैठकों में जमीन आवंटन पर सहमति जताते हैं, और दूसरी तरफ बाहर आकर इसे मुद्दा बनाकर राजनीति करते हैं. सिंह ने इसे कांग्रेस की ‘ओछी राजनीति’ करार दिया और कहा कि जनता को गुमराह करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.
सीपी सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के बजाय इसे विवादों में घसीटा गया? उन्होंने दावा किया कि सहकारी समिति ने सभी नियमों का पालन किया था, लेकिन राजनीतिक द्वेष की वजह से इसे रोका गया.
बता दें कि झारखंड में विधायकों के लिए आवासीय समिति के जरिए जमीन आवंटन की चर्चा लंबे समय से चल रही थी. सरकार ने इसके लिए जमीन चिह्नित करने और आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू की थी, लेकिन बीच में ही इस पर विवाद खड़ा हो गया. मामला कोर्ट-कचहरी और जांच के घेरे में आने लगा, जिसके बाद सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए. फिलहाल यह पूरा प्रोजेक्ट रुक गया है, जिससे उन विधायकों में भी नाराजगी है जो वर्षों से रांची में अपने आशियाने का इंतजार कर रहे थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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