Cyclone Arnab Kya Hai: बंगाल की खाड़ी से उठे मौसमी सिस्टम ‘अर्नब’ (डिप्रेशन) ने देश के 14 राज्यों में भयंकर तबाही मचा रखी है. दक्षिण छत्तीसगढ़ से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहे इस चक्रवाती सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत देश के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश और 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है.
उत्तर प्रदेश में लगातार 48 घंटे से जारी बारिश के कारण हुए हादसों में 13 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा और गरियाबंद में नदियां उफान पर हैं और सड़कें सैलाब में तब्दील हो चुकी हैं.
बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब (Deep Depression) तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा से टकराने के बाद जमीन के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ा है. उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों के नामकरण की अंतरराष्ट्रीय सूची के अनुसार बांग्लादेश द्वारा सुझाए गए नाम ‘अर्नब’ (जिसका बांग्ला में अर्थ ‘समुद्र’ होता है) के इस मौसमी सिस्टम ने पूरे उत्तर व मध्य भारत के मौसम को बिगाड़ दिया है.
हालांकि यह डिप्रेशन अब कमजोर हो रहा है, लेकिन हवा में मौजूद भारी नमी के कारण 14 राज्यों में भीषण बारिश और तबाही का दौर जारी है.
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश और 50 किमी/घंटे की तेज हवाएं आफत बनकर बरस रही हैं. अलग-अलग जिलों में दीवार गिरने, मकान ढहने और बिजली गिरने जैसे हादसों में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य के 32 जिलों में बाढ़ का संकट मंडरा रहा है, जबकि फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. मौसम विभाग ने बिहार के 19 जिलों में भी बारिश का यलो अलर्ट जारी कर दिया है.
छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग ‘अर्नब’ के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. पांच दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से गांव से लेकर शहर तक जलमग्न हो चुके हैं. जगदलपुर में ऐतिहासिक इंद्रावती नदी पुराने पुल के पास खतरे के निशान को पार कर चुकी है. लालबाग, डोंगाघाट और श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड जैसे रिहाइशी इलाकों में नदी का पानी भर गया है, जिससे लोग अपने बुजुर्गों और बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित ठिकानों पर भागने को मजबूर हैं.
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बंगाल की खाड़ी से आए इस चक्रवाती तूफान के कारण छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना समेत 14 राज्यों में आपदा प्रबंधन टीमें (SDRF/NDRF) अलर्ट मोड पर हैं. किसानों की तैयार फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं. प्रशासन की ओर से नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कराई जा रही है और प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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