दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राजनीतिक दल और उनके उम्मीदवार चुनाव के दौरान किसी भी तरह की अपमानजनक सामग्री का उपयोग न करें, जिससे माहौल खराब हो. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने यह निर्देश एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आम आदमी पार्टी (आप) आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मुफ्त उपहारों का प्रचार करने और घृणा, पूर्वाग्रह और अपमानजनक सामग्री का प्रसार करने के लिए जनता को रोजाना स्पैम कॉल कर रही है.
न्यायालय ने तीन युवा वकीलों द्वारा दायर जनहित याचिका को बंद कर दिया, यह देखते हुए कि भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने उनकी शिकायत का संज्ञान लिया है. यह देखते हुए कि ईसीआई ने मुख्य चुनाव अधिकारी से मामले की जांच करने को कहा है, न्यायालय ने कहा कि आयोग या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. याचिकाकर्ताओं में से एक ड्रोन दीवान ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कहा कि वॉयस कॉल से यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि किसी विशेष पार्टी को वोट नहीं दिया गया तो यह मतदाताओं के लिए बुरा और अप्रिय होगा क्योंकि मुफ्त में दी जाने वाली चीजें वापस ले ली जाएंगी.
ईसीआई की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धांत कुमार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की 25 जनवरी को प्राप्त शिकायत का संज्ञान लिया गया है और मुख्य चुनाव अधिकारी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि दिशा-निर्देश जारी करने के लिए अन्य प्रार्थनाएं सर्वोच्च न्यायालय के 2004 के फैसले के अंतर्गत आती हैं, जिसमें पूरे भारत में मीडिया प्रमाणन और निगरानी समितियों का गठन किया गया था. उन्होंने न्यायालय को यह भी बताया कि ईसीआई द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें वॉयस कॉल सहित राजनीतिक विज्ञापनों को प्रमाणित करना अनिवार्य किया गया है.
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अदालत ने कहा निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना चाहिए. याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा कि जहां तक विधानसभा में चुनाव कराने का सवाल है, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का प्राथमिक कर्तव्य है कि वह चुनाव के संचालन की निगरानी करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे. अदालत ने कहा, इसलिए चुनाव आयोग का यह कर्तव्य बनता है कि वह ऐसे संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए, जिनसे माहौल खराब होने की संभावना है. न्यायालय ने कहा कि राज्य चुनाव अधिकारी, मुख्य चुनाव अधिकारी और जिला चुनाव अधिकारी पूरी तरह से सशक्त और कर्तव्यबद्ध हैं कि वे यह जांच करें कि राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों द्वारा ऐसे संदेश और विज्ञापन सामग्री प्रसारित नहीं की जा रही है, जिससे चुनाव में माहौल खराब होने की प्रवृत्ति है.
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