Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा के गंभीर संकट से जूझ रही है. अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘आईक्यूएआर’ की लाइव रैंकिंग के अनुसार, दिल्ली अब दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बन गया है. गुरुवार (20 नवंबर, 2025) को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 506 तक पहुँच गया, जो कि ‘खतरनाक’ (Hazardous) श्रेणी में आता है. इस अभूतपूर्व प्रदूषण ने न सिर्फ इंसानों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है, बल्कि पालतू जानवरों के लिए भी खतरा उत्पन्न कर दिया है.
दिल्ली की जहरीली हवा ने अब बेजुबानों को भी नहीं बख्शा है. सोशल मीडिया पर एक पालतू कुत्ते की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों को सहमा दिया है. इस तस्वीर में एक कुत्ते को श्वास संबंधी तकलीफ के कारण नेबुलाइजर लेते हुए देखा जा सकता है. यह मार्मिक तस्वीर इस बात का सबूत है कि प्रदूषण का स्तर कितना घातक हो चुका है. विशेषज्ञों के अनुसार, पालतू जानवरों, खासकर कुत्तों, में ब्रोंकाइटिस, साँस लेने में तकलीफ और अन्य फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि वे लगातार जमीन के करीब रहते हैं और प्रदूषण के भारी कणों (PM 2.5) के सीधे संपर्क में आते हैं.
आईक्यूएआर की लाइव रैंकिंग के अनुसार, दिल्ली का AQI 506 दर्ज किया गया, जो इसे वैश्विक सूची में शीर्ष पर रखता है. तुलनात्मक रूप से, अन्य प्रमुख प्रदूषित शहरों का AQI बहुत कम है:
दक्षिण एशिया के कई बड़े शहर, जिनमें भारत के कोलकाता (AQI 211) और मुंबई (AQI 160) भी टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं, गंभीर वायु संकट का सामना कर रहे हैं. हालांकि, दिल्ली का 500+ AQI स्पष्ट रूप से सबसे खतरनाक स्थिति को दर्शाता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने AQI 500 के पार पहुँचने पर गंभीर चेतावनी जारी की है. इस स्तर पर हवा में मौजूद महीन कण (PM 2.5 और PM 10) फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर जाते हैं.
लगातार बढ़ते प्रदूषण के बावजूद, समस्या के समाधान के लिए ठोस और प्रभावी कदम जमीन पर कम ही दिखाई दे रहे हैं. पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, सर्दियों में हवा की गति कम होना और वाहनों का धुआँ दिल्ली के प्रदूषण के मुख्य कारक बने हुए हैं. सरकार और प्रशासन द्वारा केवल आपातकालीन उपाय जैसे निर्माण कार्य पर रोक और ऑड-ईवन योजना पर विचार किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक और स्थायी समाधान की सख्त आवश्यकता है. जब तक हर स्तर पर कठोर कदम नहीं उठाए जाते, दिल्ली को इस ‘गैस चैंबर’ जैसी स्थिति से बाहर निकलना मुश्किल होगा.
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