दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के ड्रग फ्री दिल्ली अभियान के तहत दक्षिण पश्चिम जिले की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने तीन ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है. उनके कब्जे से 170 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया है, जिसे आमतौर पर मॉली या एक्सटेसी के नाम से जाना जाता है. यह ड्रग आमतौर पर पार्टियों में उपयोग किया जाता है. जब्त किए गए मादक पदार्थ की बाजार में कीमत लगभग 85 लाख रुपये आंकी गई है.
24 फरवरी 2025 को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचना मिली कि महिपालपुर क्षेत्र में ड्रग सप्लाई करने वाले तीन व्यक्ति ड्रग्स बेचने के लिए आने वाले हैं. सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें एसआई अनिल, छगन लाल, एएसआई वेद प्रकाश, सतनारायण, एचसी दीपक, संदीप, नवीन, सुन्दर और कांस्टेबल मोहित शामिल थे. इस टीम ने दक्षिण पश्चिम जिले के एसीपी ऑपरेशन्स विजय सिंह की निगरानी में आरोपियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया.
रात करीब 10:10 बजे तीन संदिग्ध व्यक्तियों को मसूदपुर गांव की ओर से आते देखा गया. पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई की, लेकिन संदिग्धों ने स्थिति को भांपते हुए भागने की कोशिश की. पुलिस ने दो आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया, जबकि एक फरार हो गया. पकड़े गए आरोपियों की पहचान एमडी राहुल (23) और एस के साबिर (36) के रूप में हुई. दोनों फिलहाल मसूदपुर गांव में किराए के मकान में रह रहे थे.
तलाशी के दौरान एमडी राहुल के पास से पांच ग्राम एमडीएमए और एस के साबिर के पास से 92 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उनका तीसरा साथी मोहम्मद बाबुल, जो कि एमडी राहुल का भाई है, मौके से फरार हो गया था. बरामदगी के आधार पर वसंत कुंज नॉर्थ थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत मामला दर्ज किया गया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
इसके बाद पुलिस ने अदालत से आरोपियों की रिमांड ली और गहन जांच के दौरान 28 फरवरी 2025 को फरार आरोपी मोहम्मद बाबुल को भी गिरफ्तार कर लिया. उसके पास से 73 ग्राम एमडीएमए बरामद हुआ. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसके संबंध कुछ विदेशी नागरिकों से भी हैं, जिनसे वह ड्रग्स की सप्लाई करता था.
गिरफ्तार आरोपियों में एस के साबिर और मोहम्मद बाबुल एक संगठित ड्रग तस्करी गिरोह से जुड़े हुए थे. ये दोनों कुख्यात ड्रग सप्लायर्स आर्यन और टोनी के लिए काम करते थे, जो वर्तमान में जेल में बंद हैं. उन्होंने इन्हीं से ड्रग्स सप्लाई के गुर सीखे और बाद में अपने नेटवर्क के जरिए एमडीएमए की तस्करी शुरू कर दी. ये लोग गुप्त कोड भाषा और सुरक्षित डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर ड्रग्स की डीलिंग करते थे, ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें. इनके ग्राहक अधिकतर वे लोग होते थे, जो पार्टी ड्रग्स की मांग रखते थे. भुगतान के लिए ये लोग नकद लेनदेन या डिजिटल वॉलेट्स का उपयोग करते थे, जिससे इनका वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड आसानी से पकड़ा न जा सके.
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एस के साबिर, निवासी मालदा, जिला मिदनापुर, पश्चिम बंगाल, ड्रग तस्करी में लंबे समय से सक्रिय था. वह पहले से ही कुख्यात ड्रग सप्लायर्स आर्यन और टोनी के लिए काम करता था. इसके खिलाफ कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला, लेकिन यह सक्रिय रूप से ड्रग तस्करी में संलिप्त था.
मोहम्मद बाबुल, निवासी कलपिर गांव, जिला किशनगंज, बिहार, पहले भी एनडीपीएस एक्ट के तहत फरीदाबाद, हरियाणा में एक मामले में शामिल रहा है. वह लंबे समय से ड्रग तस्करी में संलिप्त था और अपने नेटवर्क के जरिए एमडीएमए की सप्लाई कर रहा था.
एमडी राहुल, निवासी कलपिर गांव, जिला किशनगंज, बिहार, हाल ही में अपने भाई मोहम्मद बाबुल के साथ जुड़ा था और ड्रग्स सप्लाई के तरीके सीख रहा था. कुल 170 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया, जिसका बाजार मूल्य लगभग 85 लाख रुपये है. पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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