Delhi Turkman Gate Violence Update: दिल्ली के तुर्कमान गेट पर जब सरकारी जमीन से कब्जा हटाने गई टीम पर पत्थर बरस रहे थे और पुलिसवाले लहूलुहान हो रहे थे, तब समाजवादी पार्टी के नेताओं को इसमें ‘अपराध’ नहीं, बल्कि ‘मजबूरी’ और ‘साजिश’ की बू आ रही थी. हाईकोर्ट के आदेश का पालन करा रही पुलिस पर हमला हुआ, लेकिन सपा के दिग्गजों का रवैया ऐसा है मानो पत्थरबाजों के हाथों में पत्थर नहीं, बल्कि फूल थे. रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी की भूमिका पर दिल्ली पुलिस को शक है. दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता एसटी हसन हिंसा को एक्शन का रिएक्शन बताते हुए जस्टिफाई करने में जुटे हैं.
दिल्ली पुलिस को आशंका है कि तुर्कमान गेट पर हुई हिंसा कोई अचानक भड़का गुस्सा नहीं, बल्कि एक ‘प्री-प्लांड स्क्रिप्ट’ थी. इस स्क्रिप्ट के किरदार अब सामने आ रहे हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से जल्द पूछताछ होगी. आरोप है कि हिंसा भड़कने से ठीक पहले सांसद घटनास्थल पर मौजूद थे.
हैरानी की बात यह है कि सीनियर पुलिस अधिकारियों ने सांसद से वहां से जाने का अनुरोध भी किया था, ताकि माहौल शांत रहे. लेकिन, शांति की अपील करने के बजाय सांसद वहां डटे रहे. अब पुलिस यह जांच रही है कि क्या उनकी मौजूदगी ने भीड़ को मूक समर्थन दिया? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भड़काऊ वीडियो और सांसद की लोकेशन का मिलान किया जा रहा है.
एक जिम्मेदार नेता को शांति की अपील करनी चाहिए थी तो मुरादाबाद से सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन पत्थरबाजों के प्रवक्ता बन बैठे. तुर्कमान गेट हिंसा पर उन्होंने ऐसा बयान दिया, जो आग में घी डालने जैसा है. हसन साहब फरमाते हैं-
‘कार्रवाई का रिएक्शन तो होता ही है… लोग कब तक विरोध करने से बचते रहेंगे? आखिर कब तक लोग बर्दाश्त करेंगे?’
एसटी हसन का यह तर्क उस भीड़ को क्लीन चिट देने जैसा है जिसने एसएचओ समेत कई पुलिसकर्मियों का सिर फोड़ दिया. क्या हसन यह कहना चाहते हैं कि हाई कोर्ट के आदेश पर हो रही एमसीडी की कार्रवाई का जवाब पत्थरों से दिया जाना जायज है?
एफआईआर चीख-चीख कर बता रही है कि पुलिस बार-बार अनाउंसमेंट कर रही थी. मस्जिद सुरक्षित है, कार्रवाई सिर्फ अवैध कब्जे पर है. लेकिन भीड़ सुनने को तैयार नहीं थी. 30-35 लोगों की भीड़ ने पुलिस को घेरा, लाउडस्पीकर तोड़े और पत्थरों की बारिश कर दी. इस मामले में पुलिस ने 30 उपद्रवियों की पहचान कर ली है और 5 आरोपियों (शाहनवाज, आरिब, कासिफ, अदनान, कैफ) को गिरफ्तार भी कर लिया है.
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जब कानून अपना काम कर रहा था, तो ‘सियासी उकसावे’ की क्या जरूरत थी? अब जब पुलिस सीसीटीवी और बॉडी कैमरे खंगाल कर ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुंचने वाली है, तो सपा नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है. सांसद नदवी रडार पर हैं और एसटी हसन बयानों की ढाल लेकर खड़े हैं. जनता समझ रही है कि कौन कानून के साथ है और कौन ‘पत्थरबाजों’ के साथ.
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