Delimitation Bill POK Connection: संसद के विशेष सत्र में चल रही ऐतिहासिक चर्चा के बीच बीजेपी नेता बूरा नरसैया गौड़ ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने गलियारों में हलचल मचा दी है. जहां विपक्ष परिसीमन (Delimitation Bill) को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के विवाद में उलझा है, वहीं बीजेपी नेता ने इसे पीओके (Pakistan-occupied Kashmir) की वापसी से जोड़ दिया है. गौड़ ने दावा किया है कि इस बिल के पास होते ही पीओके को वापस भारत में मिलाने की कानूनी और संवैधानिक नींव और भी मजबूत हो जाएगी.
बूरा नरसैया गौड़ ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि परिसीमन बिल की सबसे बड़ी ‘खूबसूरती’ इसके भविष्य के विजन में छिपी है. उन्होंने कहा कि इस बिल में पीओके के लिए भी सीटें आवंटित की गई हैं. इसका मतलब है कि एक दिन जब हम पीओके को वापस हासिल कर लेंगे, तो वहां के लोग 77 साल के लंबे इंतजार के बाद पहली बार अपने वोट का इस्तेमाल कर सकेंगे. उनके चुने हुए प्रतिनिधि भारत की लोकसभा और राज्यसभा में बैठेंगे.
आगे उन्होंने कहा कि यह बिल पीओके के लोगों को लोकतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ने का अधिकार देता है. गौड़ के इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि सरकार लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने के पीछे केवल जनसंख्या ही नहीं बल्कि अखंड भारत का एक बड़ा रणनीतिक विजन भी लेकर चल रही है.
लोकसभा में गुरुवार को 12 घंटे की मैराथन बहस के बाद इन तीन महत्वपूर्ण बिलों पर आज 4 बजे वोटिंग की प्रक्रिया शुरू होनी है:
संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026: महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देना.
परिसीमन विधेयक 2026: लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करना और नए सिरे से सीमाओं का निर्धारण. (इसी बिल में पीओके का एंगल चर्चा में है).
यूनियन टेरिटरी लॉ अमेंडमेंट बिल: दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना.
यह भी बताते चलें इन विधेयकों को लेकर सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को जमीन पर उतार दिया जाए. इसके लिए 2023 के कानून में बदलाव कर ‘डिलिमिटेशन’ प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का रोडमैप तैयार किया गया है.
यह भी पढ़ें: केंद्र ने जारी की अधिसूचना, इस दिन से प्रभावी होगा महिला आरक्षण अधिनियम
जहां विपक्षी दल महिला आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं, वहीं वे परिसीमन बिल के खिलाफ पूरी तरह लामबंद हैं. इसको लेकर विपक्ष का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा.
हालांकि, बीजेपी नेता बूरा नरसैया गौड़ के बयान ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है. बीजेपी का मानना है कि यह बिल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है बल्कि जम्मू-कश्मीर और पीओके को लेकर भारत के संकल्प को दुनिया के सामने दोहराने का एक जरिया भी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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