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24 घंटे का अल्टीमेटम और संघ का एजेंडा… क्या नीट विवाद में हटेगी धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी या इस मास्टरस्ट्रोक से बचेगी बाजी?

Dharmendra Pradhan Resignation: नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में जारी सीजेपी आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है. प्रदर्शनकारियों ने सरकार को विचार करने के लिए 24 घंटे का वक्त दिया है. लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना लगभग असंभव है.

नीट विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, लेकिन राजनीतिक समीकरणों के चलते उनका इस्तीफा होना लगभग असंभव है. धर्मेंद्र प्रधान मोदी कार्यकाल में सबसे लंबे समय (5+ वर्ष) तक सेवा देने वाले शिक्षा मंत्री हैं और उन्हें सरकार का ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ माना जाता है. NEP 2020 को लागू करने, भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को बढ़ावा देने और संघ (RSS) के वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को देखते हुए सरकार द्वारा उनका पद से हटना बेहद मुश्किल है.

छात्र आंदोलन में नया मोड़ (Education Minister Dharmendra Pradhan)

नीट विवाद के बाद दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन में नया मोड़ आ गया है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि सरकार ने मुआवजे और एफआईआर वापसी पर सहमति जताई है, लेकिन वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं. इसके लिए सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है.

हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान का पद से हटना आसान नहीं है. मोदी सरकार के पिछले 12 सालों में वे अकेले ऐसे शिक्षा मंत्री हैं जिन्होंने बिना ब्रेक के सबसे लंबी पारी खेली है. स्मृति ईरानी, प्रकाश जावडेकर और रमेश पोखरियाल के बाद उन्होंने इस पद को मजबूती से संभाला है.

एजेंडे को लागू करने में अहम भूमिका (RSS Education Agenda)

संघ (RSS) के एजेंडे को लागू करने में उनकी अहम भूमिका रही है. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और मातृभाषा में शिक्षा जैसे राष्ट्रीय विचारों को प्रमुखता से लागू किया है. इसके अलावा मैकाले की शिक्षा पद्धति को हटाकर पाठ्यक्रम में भारतीय दर्शन और इतिहास को जोड़ना उनकी बड़ी उपलब्धि माना जाता है. संगठन में गहरी पकड़ और ओबीसी वर्ग के बड़े नेता होने के कारण सरकार उनके विकल्प की जगह उनके अनुभव पर भरोसा बनाए रखना चाहेगी.

यह भी पढ़ें- पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन: 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाला बिल मंजूर

-भारत एक्सप्रेस

Shubhra Rai

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