सांकेतिक तस्वीर.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को ओडिशा तट पर स्थित रक्षा सुविधा से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रणोदन आधारित मिसाइल प्रणाली का अंतिम दौर का परीक्षण सफलतापूर्वक किया.
स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल प्रणाली का परीक्षण एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) के लॉन्चिंग कॉम्प्लेक्स-III में एक स्थिर लांचर से किया गया. यह एक महीने में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के साथ तीन अलग-अलग श्रेणियों की मिसाइलों को शामिल करने वाला तीसरा सफल मिशन था.
रक्षा सूत्रों ने कहा कि SFDR द्वारा संचालित मिसाइल ने उन्नत प्रणोदन प्रणाली और कई अन्य महत्वपूर्ण घटकों को मान्य करते हुए सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया. मिसाइल ने अपने इच्छित प्रक्षेप पथ पर मैक 3 (ध्वनि की गति से तीन गुना) से अधिक गति से उड़ान भरी और हवाई लक्ष्य को सटीकता से बेअसर कर दिया.
एक रक्षा अधिकारी ने कहा, “टेलीमेट्री, रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम सहित कई रेंज उपकरणों द्वारा कैप्चर किए गए डेटा ने इसके प्रदर्शन की पुष्टि की है. यह सिस्टम का अंतिम विकासात्मक परीक्षण हो सकता है क्योंकि दोषरहित मिशन संकेत देता है कि सिस्टम प्रेरण के लिए तैयार है.”
कहा जाता है कि भारत इस अत्याधुनिक SFDR तकनीक को विकसित करने वाला पहला देश है, जो 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर सुपरसोनिक गति से तेज गति से चलने वाले हवाई लक्ष्यों को बेअसर करने में सक्षम लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को विकसित करने में मदद करेगी. SFDR को रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL), हैदराबाद द्वारा अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI), हैदराबाद और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL), पुणे जैसी अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया है.
उन्नत प्रणोदन प्रणाली, नोजल-रहित बूस्टर और थ्रस्ट मॉड्यूलेशन प्रणाली से लैस, मिसाइल को रैमजेट मोड में विशिष्ट आवेग देने के लिए विशिष्ट रूप से डिजाइन किया गया है.
अधिकारी ने कहा, “SFDR-आधारित मिसाइल को आमतौर पर विमान-प्रक्षेपण स्थितियों का अनुकरण करने के लिए उच्च-ऊंचाई वाले प्रक्षेप पथ में बढ़ाया जाता है और फिर नोजल-रहित बूस्टर हथियार को उसके लक्ष्य की ओर निर्देशित करता है. यह प्रणाली एक ठोस ईंधन वाले वायु-श्वास रैमजेट इंजन का उपयोग करती है, जो उड़ान के दौरान वातावरण से ऑक्सीजन लेती है.”
पिछले महीने DRDO के पूर्व अध्यक्ष जी सतीश रेड्डी ने मीडिया को बताया था कि SFDR देश को लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल विकसित करने में मदद करेगा. उन्होंने कहा था कि एक बार पूरी तरह से विकसित होने के बाद, भारत ऐसी क्षमता रखने वाला पहला देश होगा.
16 नवंबर को भारत ने 1,500 किलोमीटर दूर के लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम अपनी पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था. 3,500 किलोमीटर की रेंज वाली K-4 मिसाइल का 27 नवंबर को INS अरिघाट पनडुब्बी से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था.
ये भी पढ़ें: भारत ने चीन से खिलौनों के आयात में 4 सालों में 80% की कटौती की, निर्यात 15 करोड़ डॉलर पार
-भारत एक्सप्रेस
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान समर्थित अकाउंट से फैलाए गए उस दावे को भारतीय सेना ने…
Yam Deep Daan on Dhanteras: धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपदान करने की परंपरा…
Google DeepMind AI Military Controversy: पेंटागन और इजरायल के साथ सैन्य समझौतों के विरोध में…
नई दिल्ली के PHD हाउस में आयोजित स्पोर्ट्स CSR Summit में खेल राज्य मंत्री रक्षा…
दिल्ली हाईकोर्ट ने सैन्य खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपी हबीब-उर-रहमान की जमानत याचिका खारिज…
सुप्रीम कोर्ट वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और स्कूलों में इसे अनिवार्य…