रिपोर्ट-नतांश पटेल
Dungarpur cyber hunt 2.0 sex scam gang busted: राजस्थान के डूंगरपुर जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक चोट की है. ‘ऑपरेशन साइबर हंट 2.0’ के तहत दोवड़ा थाना पुलिस ने लीलवासा गांव के पास एक पुराने और सुनसान खंडहर पर छापेमारी कर एक संगठित ‘साइबर सेक्स-स्कैम’ गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मौके से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है.
बता दें कि ये अपराधी इतने शातिर थे कि पकड़े जाने के डर से इन्होंने आबादी से दूर खंडहरों को अपना कंट्रोल रूम बना रखा था, जहाँ से ये इंटरनेट के जरिए देशभर में अपना जाल फैला रहे थे. इस कार्रवाई के बाद से पूरे वागड़ क्षेत्र के साइबर ठगों में हड़कंप मच गया है.
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह (Dungarpur Cyber Crime) का काम करने का तरीका बेहद प्रोफेशनल और खतरनाक था. ये अपराधी कुछ चर्चित एस्कॉर्ट वेबसाइट्स पर फर्जी विज्ञापन डालते थे. इंटरनेट से डाउनलोड की गई खूबसूरत और अश्लील तस्वीरों का सहारा लेकर ये लोगों को आकर्षित करते और फिर व्हाट्सएप या टेलीग्राम के जरिए उनसे संपर्क साधते थे.
वहीं एक बार शिकार जाल में फँस जाता तो ये ‘एडवांस पेमेंट’ और ‘बुकिंग चार्ज’ के नाम पर फर्जी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे. इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का असली खेल, जहाँ पीड़ित की चैट और कॉल रिकॉर्डिंग्स का डर दिखाकर उससे मोटी रकम वसूली जाती थी.
पुलिस ने छापेमारी के दौरान खंडहर से 27 हाई-टेक मोबाइल फोन और 38 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं. इससे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह (Dungarpur Cyber Crime) में शामिल अधिकांश युवकों की उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है. आधुनिक सुख-सुविधाओं और कम समय में अमीर बनने की चाहत ने इन पढ़े-लिखे युवाओं को अपराध की अंधी खाई में धकेल दिया है.
पुलिस के मुताबिक, ये युवक न केवल ठगी करते थे बल्कि फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों का एक पूरा नेटवर्क चला रहे थे, जिससे इनके असली स्थान को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. अब पुलिस इनके बैंक ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्होंने अब तक कितने करोड़ का चूना लगाया है.
एसपी के नेतृत्व में चल रहा ‘ऑपरेशन साइबर हंट 2.0’ जिले में साइबर अपराधियों के लिए काल साबित हो रहा है. इस अभियान के तहत अब तक कुल 93 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है और 126 मोबाइल व 225 सिम कार्ड जब्त किए गए हैं. पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि तकनीक का दुरुपयोग कर मासूमों को ठगने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है.
पुलिस अब उन ‘मास्टरमाइंड्स’ की तलाश में जुटी है जो इन युवाओं को ट्रेनिंग देते थे और उन्हें फर्जी आईडी व डेटा उपलब्ध कराते थे. इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि पुलिस की नजर अब गांव के उन खंडहरों तक भी पहुँच चुकी है, जिन्हें अपराधी अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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