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धुआं नहीं, सिर्फ भाप छोड़ेगी! पटरी पर दौड़ने को तैयार देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें क्या है इसकी खासियत?

भारतीय रेलवे अब अपने इतिहास में एक नई शुरुआत करने जा रहा है. देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेनसेट को जल्द ही हरी झंडी दिखाई जाएगी. यह ट्रेन खास इसलिए है क्योंकि यह चलने के लिए बाहर से बिजली लेने के बजाय अपने अंदर ही बिजली तैयार करेगी. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की मदद से बनने वाली यह ऊर्जा ट्रेन को चलाएगी और इसका मुख्य उप-उत्पाद सिर्फ पानी की भाप होगी. यानी प्रदूषण बेहद कम होगा और यह ट्रेन पर्यावरण के लिहाज से रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है.

भारतीय रेलवे का सफर हमेशा बदलती तकनीक का गवाह रहा है. कभी भाप के इंजन से शुरू हुआ यह सफर डीजल इंजनों तक पहुंचा और फिर तेजी से इलेक्ट्रिक ट्रेनों की ओर बढ़ा. पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण किया है. आज देश के 99 प्रतिशत से ज्यादा ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क पर बिजली की सुविधा उपलब्ध है. अब रेलवे स्वच्छ ऊर्जा के अगले दौर में कदम रखने की तैयारी कर रहा है.

हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है?

आम डीजल इंजन में ईंधन जलाकर ताकत पैदा की जाती है, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन का तरीका अलग है. इसमें प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल लगाया गया है, जो एक छोटे पावर प्लांट की तरह काम करता है.

ट्रेन में रखे गए हाइड्रोजन सिलेंडर से गैस फ्यूल सेल तक पहुंचती है. वहां यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती है और बिजली पैदा होती है. यही बिजली ट्रेन की मोटर को चलाती है और पहियों को गति देती है. इस पूरी प्रक्रिया में न तो ईंधन जलता है और न ही धुआं निकलता है. इसका सीधा परिणाम सिर्फ पानी की भाप और थोड़ी गर्मी के रूप में सामने आता है.

सुरक्षा को लेकर किया गया खास इंतजाम

हाइड्रोजन को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि यह ज्वलनशील गैस है, तो क्या यात्रियों के लिए यह ट्रेन सुरक्षित होगी? रेलवे ने इस बात को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है.

ट्रेन में ऐसे सेंसर लगाए गए हैं जो हाइड्रोजन लीक, ज्यादा गर्मी, आग या धुएं जैसी स्थितियों का तुरंत पता लगा सकते हैं. इसके अलावा पूरे सिस्टम को कई सुरक्षा जांचों से गुजारा गया है ताकि सामान्य और आपातकालीन दोनों परिस्थितियों में ट्रेन सुरक्षित तरीके से चल सके.

इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच शामिल हैं. दोनों पावर कार मिलकर करीब 1,200 किलोवाट की क्षमता पैदा करती हैं और ट्रेन को 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार देने में सक्षम हैं.

जींद-सोनीपत रूट से शुरू होगा संचालन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरुआत में हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलेगी. करीब 89 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर यह ट्रेन जींद, गोहाना और सोनीपत जैसे प्रमुख स्टेशनों को जोड़ेगी. इसके अलावा रास्ते में आने वाले कई छोटे स्टेशनों पर भी इसका ठहराव प्रस्तावित है.

इस रूट को इसलिए चुना गया है ताकि रोजाना की परिस्थितियों में हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमता, सुरक्षा और भरोसेमंद संचालन को परखा जा सके.

जींद में बना खास हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन

हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए रेलवे ने हरियाणा के जींद में एक विशेष हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा तैयार की है. यह देश की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग फैसिलिटी बताई जा रही है.

इस केंद्र पर पहले पानी से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए हाइड्रोजन तैयार की जाती है. इसके बाद इसे सुरक्षित टैंकों में जमा किया जाता है. फिर हाइड्रोजन को 500 बार तक दबाव में रखा जाता है ताकि ज्यादा मात्रा कम जगह में स्टोर की जा सके. ट्रेन में ईंधन भरने के लिए इसे नियंत्रित दबाव के साथ डिस्पेंसर के जरिए भेजा जाता है.

इस सुविधा में करीब 3,000 किलोग्राम तक हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता है. इसके स्टोरेज और सप्लाई सिस्टम को सुरक्षा मानकों के अनुसार मंजूरी भी मिल चुकी है.

कई कठिन परीक्षणों के बाद मिली तैयारी

ट्रेन को यात्रियों के लिए तैयार करने से पहले कई चरणों में इसकी जांच की गई. इलेक्ट्रिकल सिस्टम की क्षमता जांचने के लिए लोड टेस्ट किए गए. रेडियो फ्रीक्वेंसी टेस्ट से यह देखा गया कि ट्रेन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सिग्नल और कम्युनिकेशन व्यवस्था में कोई परेशानी पैदा न करें.

इसके अलावा ट्रेन की स्थिरता, गति के दौरान संतुलन और आपातकालीन ब्रेकिंग क्षमता की भी जांच की गई. सभी परीक्षणों में सफल रहने के बाद ही इसे नियमित संचालन के लिए तैयार माना गया.

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-भारत एक्सप्रेस

कोमल शर्मा, वरिष्ठ संवाददाता

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