IFFCO CEO Udai Shanker Awasthi Retirement: भारतीय उर्वरक और सहकारी क्षेत्र के दिग्गज डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने 58 साल के शानदार करियर के बाद IFFCO के MD & CEO पद से रिटायरमेंट ली. भारतीय उर्वरक और सहकारी क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में गिने जाने वाले डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने आधिकारिक तौर पर रिटायरमेंट घोषणा कर दी है. उन्होंने 31 जुलाई 2025 को भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) पद से विदा ली.
आपको बता दें 80 वर्ष की आयु में कार्यमुक्त हुए डॉ. अवस्थी का करियर लगभग 58 वर्षों का रहा, जिसमें से 32 साल से अधिक उन्होंने IFFCO को समर्पित किए.
लगभग चार दशकों तक वे देश की अग्रणी कंपनियों पायराइट्स, फॉस्फेट्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (PPCL), राष्ट्र्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) और अंततः IFFCO – के शीर्ष पदों पर रहे. इस दौरान उन्होंने न सिर्फ भारतीय उर्वरक उद्योग का परिदृश्य बदला बल्कि किसानों और सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा दी.
अपने रिटायरमेंट पर डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने एक भावुक संदेश साझा किया. उन्होंने अपने लंबे करियर में मिले सहयोग के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि इस सफर ने उन्हें अनगिनत दोस्तियां और रिश्ते दिए. उन्होंने बताया कि कला, संगीत, वन्यजीवन, इंजीनियरिंग, प्रशासन और कूटनीति-हर क्षेत्र में उन्हें ऐसे मित्र और सहयोगी मिले जिन्होंने उनके जीवन को समृद्ध बनाया.
डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने स्मरण किया कि उन्हें भारत के कई माननीय मंत्रियों, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर दुनिया के राजाओं और सुल्तानों तक के साथ काम करने और मिलने का अवसर मिला.
IFFCO को आज जिस ऊँचाई पर देखा जाता है- दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी उर्वरक संस्था के रूप में- उसकी नींव में डॉ. अवस्थी की सोच और नेतृत्व है. उन्होंने न सिर्फ भारत को उर्वरक उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि किसानों, सहकारी समितियों, पेशेवरों, सहायक कंपनियों और वैश्विक साझेदारों को जोड़कर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया.
बहरहाल, वे औपचारिक पदों से हट रहे हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि सार्वजनिक सेवा, खासकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने सहयोगियों और परिचितों को भरोसा दिलाया कि ‘मेरे दरवाज़े हमेशा खुले रहेंगे.’
डॉ. उदय शंकर अवस्थी का जीवन और काम भारतीय उर्वरक उद्योग, सहकारिता आंदोलन और ग्रामीण विकास की दिशा में एक मिसाल है. उनकी विरासत न सिर्फ IFFCO बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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