'Gen-Z' का जलवा, दुनिया में क्यों है वर्चस्व?
Gen-Z Power Secret In World: पहले बांग्लादेश और उसके बाद अब नेपाल में Gen-Z ने गदर कर दी है. युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. उन्होंने न सिर्फ अपनी मांगों पर मुहर लगवाई बल्कि सरकार को पलटकर रख दिया. पड़ोस में हो रहे प्रदर्शन के नाम में जुड़ा Gen-Z जाहिए है आंदोलन में शामिल लोगों की जनरेशन को बताया है. लेकिन, क्या आपको मन में सवाल उठता है कि आखिर जनरेशन का नाम करण कैसे शुरू हुआ? दुनिया में Gen-Z से पहले और उसकी बाद की कौन सी जनरेशन है और आखिर इन दिनों इसी जनरेशन का दुनिया में इतना वर्चस्व क्यों है?
‘द हिंदू’ में 28 अप्रैल 2024 को ‘द नेम गेम’ नाम से प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि जनरेशन के नामकरण की शुरुआत 20वीं सदी में ही हुई है. इसके बाद यह परंपरा 21वीं सदी में भी जारी रही. इसमें बताया गया कि नामकरण शैक्षणिक अनुसंधान, मीडिया और सांस्कृतिक सहमति से होता है. इसके लिए जन सांख्यिकीविद और समाजशास्त्री जनसंख्या सर्वेक्षणों, जन्म दर, सामाजिक आंकड़ों का अध्ययन किया जाता है. खैर नाम का लेबल अपनाना लोकप्रियता पर निर्भर करता है.
जनरेशन के नामकरण के लिए कुछ इतिहासकार 1926 में आई अर्नेस्ट हेमिंग्वे की किताब ‘द सन ऑल्सो राइजेज’ को आधार मानते हैं. इसमें राइटर अर्नेस्ट ने अमेरिकी लेखक गर्ट्रूड स्टीन को लॉस जनरेशन की संज्ञा दी थी. हालांकि, बाद में इसका उपयोग 1880 से लेकर 1900 तक जन्में लोगों के लिए होने लगा. क्योंकि, इस दौर में जन्मे अधिकतर लोगों ने 1914 से 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया और मौत के मुंह में समा गए. क्योंकि, इस समय दुनिया की 200 करोड़ की आबादी में से 7 करोड़ लोगों की मौत हुई थी.
साफ है जनरेशन का नामकरण करना सोशल मीडिया के कर्मवीरों का काम नहीं है. इसके पीछे कई आंकड़े होते हैं. बड़े अध्ययन और विश्लेषण के बाद जनरेशन का नाम रखा जाता है. हालांकि, इनकी पॉपुलैरिटी मीडिया और सोशल मीडिया की प्रभाव पर निर्भर करती है. जैसे आज के दौर में सबसे अधिक जेन-जी (Gen-Z) का नाम लिया जाता है.
1997-2009 के बीच जन्मे बच्चों को Gen-Z कहा जाता है. यानी उनकी उम्र 16 से 29 साल के बीच है. यही एक ऐसी उम्र होती है जब खून में उबाल होता है. इसी समय किए गए फैसलों पर भविष्य तय होता है. यह जनरेशन मिलेनियल्स यानी अपनी माता पिता से अब जिम्मेदारियों के साथ अधिकारों का अधिग्रहण कर रहे हैं. अब आने वाले कुछ साल इनके नेतृत्व में गुजरने वाले हैं. यही कारण है कि दुनियाभर में इनका वर्चस्व है. समाज सियासत से लेकर सत्ता तक वही बोता है जो यह चाहते हैं. क्योंकि, यह वो मिड जनरेशन है जो मिलेनियल्स और जनरेशन अल्फा दोनों को कन्वेंस करने में सक्षम है.
नेपाल में हुए आंदोलन का Gen-Z ने अपने हाथों के जरिए आगे बढ़ाया और सरकार को मजबूर होना पड़ा. इससे पहले बांग्लादेश में युवाओं ने आंदोलन कर शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था. नेपाल के जनसंख्या की बात करें तो देश की औसत आबादी औसत आयु 25.3 वर्ष है. 15 से 30 साल यानी जेनजी की आबादी कुल जनसंख्या का करीब एक चौथाई है. वहीं बांग्लादेश की बात की जाए तो 17.6 करोड़ की कुल जनसंख्या में 15-29 आयु वर्ग में 4.59 करोड़ (45.9 मिलियन) युवा है.
सबसे पहली जनरेशन को ‘लॉस जनरेशन’ कहा गया जो 1880 से 1900 तक जन्मे लोगों की जनरेशन थी. अब जनवरी 2025 से 9वीं जनरेशन ‘जनरेशन बीटा’ का दौर शुरू हो गया है जो 2039 तक चलने वाला है. 1 जनवरी को मिजोरम के आइजोल में जन्मा फ्रैंकी जैंडेन बीटा जनरेशन का पहला बच्चा है. हर पिछली पीढ़ी में अनुभव और नई पीढ़ी के पास अवसर होते हैं. उनके पास जिम्मेदारियां भी होती हैं नहीं निभाई गईं या कुछ बची रह गईं. ऐसे में Gen-Z को ये तय करना होगा कि वो नई पीढ़ी को कैसा रास्ता देते हैं.
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