8th Pay Commission: आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8वें वेतन आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी. यह फैसला लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत की सांस लेकर आया है. 2016 में गठित 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 में समाप्त हो रही हैं, इसलिए नया आयोग समय पर गठित करना जरूरी था. कैबिनेट ने आयोग के संदर्भ शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) को मंजूर किया, जिसमें वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन में संशोधन शामिल हैं. यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का कर्मचारी कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है.
आयोग की अध्यक्ष के रूप में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई को नामित किया गया है. देसाई जी एक अनुभवी न्यायमूर्ति हैं, जिन्होंने 2013 से 2014 तक सुप्रीम कोर्ट में सेवा की. उनकी नियुक्ति आयोग की विश्वसनीयता बढ़ाएगी. आयोग में अन्य सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जाएगी, जिसमें विशेषज्ञों और हितधारकों का समावेश होगा. देसाई जी ने कहा कि आयोग कर्मचारियों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष सिफारिशें करेगा.
टर्म्स ऑफ रेफरेंस के अनुसार, आयोग वेतनमान, महंगाई भत्ता (डीए), घर किराया भत्ता (एचआरए) और यात्रा भत्ते का पुनर्मूल्यांकन करेगा. यह 7वें आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करेगा और मुद्रास्फीति, आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई तालिका तैयार करेगा. आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18-24 महीनों का समय दिया गया है. इसमें कर्मचारी यूनियनों से परामर्श और विभिन्न विभागों से डेटा संग्रह शामिल होगा.
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी. इससे कर्मचारियों के वेतन में औसतन 20-30% की वृद्धि संभव है. पेंशनभोगियों को भी फायदा मिलेगा. सरकार ने आश्वासन दिया कि वित्तीय बोझ को ध्यान में रखते हुए संतुलित सिफारिशें होंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था में 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा, लेकिन उत्पादकता में सुधार होगा.
यह फैसला 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को लाभ पहुंचाएगा. यूनियनों ने स्वागत किया, लेकिन अधिक वेतन वृद्धि की मांग की. आने वाले दिनों में आयोग की बैठकें शुरू होंगी, और रिपोर्ट संसद में पेश होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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