नई दिल्ली में 8 अक्टूबर को जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक होने जा रही है. इस बैठक पर कारोबारियों, खासकर छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर की नजर टिकी हुई है. माना जा रहा है कि इस बार चर्चा सिर्फ GST की दरों में बदलाव तक सीमित नहीं रहेगी. सरकार का जोर GST व्यवस्था को आसान बनाने, कारोबार की लागत घटाने और टैक्स से जुड़े अनुपालन यानी कागजी और प्रक्रियागत बोझ को कम करने पर हो सकता है.
अगर प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी मिलती है, तो छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और टैक्स अधिकारियों के साथ होने वाली प्रक्रिया में कई स्तरों पर राहत देखने को मिल सकती है.
छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया रही है. कई बार रजिस्ट्रेशन के दौरान ज्यादा दस्तावेज, सत्यापन और लंबी प्रक्रिया के कारण कारोबार शुरू करने में समय लग जाता है.
इस बैठक में छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित और तेज़ पंजीकरण व्यवस्था पर विचार हो सकता है.
ई-कॉमर्स के जरिए सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों, कारीगरों और घर से कारोबार करने वालों के लिए भी बैठक अहम हो सकती है. अलग-अलग राज्यों में registration और documentation की जरूरत से छोटे sellers पर compliance का बोझ बढ़ता है.
प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य इस प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि छोटे कारोबारी बिना ज्यादा प्रशासनिक झंझट के देशभर में ऑनलाइन कारोबार कर सकें.
जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को भी ज्यादा तेज और सरल बनाने पर चर्चा हो सकती है. रिपोर्टों के मुताबिक, रिफंड एप्लीकेशन और प्रोसेसिंग के लिए करीब 17 दिन की टाइमलाईन पर विचार किया जा रहा है.
इसका फायदा खासतौर पर निर्यातकों और उन छोटे कारोबारियों को हो सकता है जिनका पैसा रिफंड के इंतजार में फंसा रहता है. छोटे व्यवसायों के लिए कार्यशील पूंजी बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए रिफंड में कुछ दिन की बचत भी उनके नकदी प्रवाह को बेहतर कर सकती है.
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) भी बैठक के अहम मुद्दों में शामिल हो सकता है. सरकार फर्जी ITC पर कार्रवाई जारी रखना चाहती है, लेकिन साथ ही यह चिंता भी है कि किसी देने वाला की गलती का नुकसान एक ईमानदार क्रेता को ना उठाना पड़े.
इसी वजह से ITC प्रक्रिया को ज्यादा प्रौद्योगिकी आधारित बनाने और इनवॉइस का ऑटोमेटेड मिलान पर जोर दिया जा सकता है. MSME संगठनों की ओर से बोनाफाईड यानी ईमानदार खरीदारों के लिए सुरक्षित बंदरगाह जैसी व्यवस्था की मांग भी उठती रही है.
GST व्यवस्था में fफेसलेस CGST इंटरफ़ेस लाने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स और अधिकारियों के बीच अनावश्यक सीधा संपर्क कम करना है. अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन और तकनीक के जरिए पूरी की जा सकेंगी. इससे पारदर्शिता बढ़ाने और कारोबारियों को बेवजह की परेशानियों से बचाने में मदद मिल सकती है.
GST कानून के तहत गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलावों पर चर्चा हो सकती है. गंभीर मामलों में टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों को सीमित करने और कुछ GST अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है.
इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ सकता है जिनसे गंभीर टैक्स चोरी के बजाय छोटी ि यात्मक गलती हो जाती है. प्रस्ताव के पीछे सोच यह है कि जानबूझकर की गई धोखाधड़ी और सामान्य कारोबारी गलती के बीच साफ अंतर होना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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