GST Rate Cut: आगामी त्योहारों के सीजन में ऑटोमोबाइल की बिक्री में तेजी आने की संभावना है, और इसके पीछे मुख्य वजह है सरकार द्वारा कुछ ऑटोमोबाइल कैटेगरी पर जीएसटी दर में कमी.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न सिर्फ ग्राहकों को राहत मिलेगी, बल्कि ऑटो सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी, जो कि देश की अर्थव्यवस्था की धड़कन है.
बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने बताया कि महामारी के बाद दोपहिया वाहन सेगमेंट कभी पूरी तरह से रिकवर नहीं कर पाया. खासकर कम पावर वाली मोटरसाइकिलों में यह कटौती बिक्री को बढ़ावा देगी. उन्होंने कहा, “इस कदम से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में जरूरी गति आएगी और खपत बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी मजबूत होगी.”
महाराष्ट्र चैम्बर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (MCCIA) के डायरेक्टर जनरल प्रशांत गिरबने के मुताबिक, नई GST दरें लागू होने के बाद वाहनों की कीमत में 7-10% तक की कमी आएगी. इससे एंट्री-लेवल और कमर्शियल सेगमेंट में मांग बढ़ने की उम्मीद है. इसके साथ ही ऑटो निर्माता त्योहारों के मौके पर ग्राहकों को ज्यादा बचत का लाभ पहुंचाने की योजना में हैं.
जहां हाई-एंड कार और मोटरसाइकिलें 40% टैक्स स्लैब में आ गई हैं, वहीं छोटे वाहन और बाइक को 28% से घटाकर 18% स्लैब में लाने का कदम खास तौर पर आम ग्राहकों के लिए उठाया गया है. यह रणनीति बेसिक लेवल की मांग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
टाटा मोटर्स के इंडायरेक्ट टैक्स हेड राजेश शुक्ला ने बताया कि ऑटो पार्ट्स पर भी 18% जीएसटी लागू होगी, जिससे कार कंपनियों और पार्ट्स निर्माताओं के लिए क्लासिफिकेशन विवाद सुलझ जाएंगे. महिंद्रा ग्रुप के सीईओ अनिश शाह ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को 5% स्लैब में रखना सकारात्मक कदम है, जिससे क्लीन और सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा.
अशोक लेलैंड के एमडी शेनू अग्रवाल के मुताबिक, जीएसटी कटौती से हाल ही में लगाए गए अमेरिकी टैरिफ का असर कम होगा. साथ ही, कमर्शियल व्हीकल्स पर राहत मिलने से माल ढुलाई की लागत घटेगी और बस व ट्रक सेगमेंट में सुधार होगा.
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फेडरेशन ऑफ चाकन इंडस्ट्रीज के सचिव दिलीप बटवाल ने बताया कि नई टैक्स दरें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी, जो त्योहारों के समय से पहले ग्राहकों और उद्योग दोनों के लिए फायदे का समय है.
बता दें कि GST में बदलाव ने ऑटो उद्योग को नई ऊर्जा दी है. छोटे वाहन, बाइक और ईवी में सस्ती दरें ग्राहकों को आकर्षित करेंगी, वहीं बड़े वाहन पर हाई टैक्स उद्योग को संतुलित रखेगा. ऑटो पार्ट्स और कमर्शियल व्हीकल्स में राहत से उद्योग की स्थिरता और बिक्री में सुधार की संभावना बढ़ रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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