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यूनिफॉर्म सिविल कोड क्यों लाया गया? गुजरात में यूसीसी लागू होने की सीएम भूपेंद्र पटेल ने बताई वजह

Gujarat UCC Bill 2026: गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को रात करीब 10:30 बजे एक ऐतिहासिक सत्र के दौरान ‘समान नागरिक संहिता विधेयक 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदन में इस विधेयक  को पेश करते हुए इसे केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि ‘सामाजिक न्याय’ और ‘नारी शक्ति’ के सम्मान का प्रतीक बताया.

मुख्यमंत्री(Bhupendra Patel) ने अपने संबोधन में दिल्ली के चर्चित श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी बेटियों को ऐसी भयावह और दर्दनाक घटनाओं से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है.

यूसीसी कानून को पेश करते हुए क्या बोले सीएम?

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस कानून की दार्शनिक पृष्ठभूमि समझाते हुए ऋग्वेद के मंत्रों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता ‘साथ चलने और साथ सोचने’ के सिद्धांत पर टिकी है, जहाँ न्याय सबके लिए समान होना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप यह कानून ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के सपने को साकार करेगा.

इस कानून(Gujarat UCC Bill 2026)  के तहत अब गुजरात में विवाह का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा, ऐसा न करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जबरन या पहचान छिपाकर किए गए विवाह के मामलों में अब 7 साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जो ‘लव जिहाद’ जैसी शिकायतों पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम है.

यह  भी पढ़ें: ईरान-US जंग का पहला शिकार बना फिलीपींस! देश में ‘नेशनल एनर्जी एमरजेंसी’ घोषित, क्या भारत में भी लग सकता है लॉकडाउन?

संपत्ति में बराबरी और ‘लिव-इन’ पर सख्त पहरा

यूसीसी लागू होने के बाद गुजरात में अब पैतृक संपत्ति में बेटियों का अधिकार बेटों के बिल्कुल बराबर होगा. मुख्यमंत्री ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बेटियों को मिलने वाला आधा हिस्सा अब इतिहास बन जाएगा क्योंकि जब हम महिलाओं को देवी के रूप में पूजते हैं, तो उन्हें हक भी बराबर का मिलना चाहिए. इसके अलावा, विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं.

अब ऐसे संबंधों का 3 महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, वरना जेल या जुर्माने की कार्रवाई होगी. सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा और उनके साथ होने वाली धोखाधड़ी रुकेगी. साथ ही, ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चों को भी अब कानूनी मान्यता और सुरक्षा प्राप्त होगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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