इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उ प्र अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दण्ड एवं अपील) नियमावली 1991 के नियम- 8 (2) (बी) के प्राविधानों के अन्तर्गत पर्याप्त साक्ष्य होने पर भी, वगैर विभागीय कार्यवाही के बर्खास्तगी करना अवैध है. कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना नियम तथा कानून के विरूद्ध है. यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम एवं अतिप्रिया गौतम की बहस सुनकर पारित किया है.
मामले के अनुसार दरोगा प्रदीप कुमार गौतम, चौकी इंचार्ज, गोलचक्कर, थाना फेस-1, नोएडा, गौतमबुद्धनगर में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत था. याची पर यह आरोप है कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसके अवलोकन से पाया गया कि वायरल वीडियों में एक व्यक्ति अपनी जेब में हाथ डालता है और पास में खड़े उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार गौतम चौकी प्रभारी गोलचक्कर, थाना फेस-1, नोएडा को कुछ रूपये पकड़ाता है.
आरोप लगाया गया है कि उक्त व्यक्ति के द्वारा चौकी प्रभारी को रिश्वत दी जा रही है. कहा गया कि दरोगा का यह कृत्य उ०प्र० सरकारी सेवक आचरण नियमावली के प्रतिकूल है, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है. वीडियो के अवलोकन से प्रथम दृष्टया अपराध कारित होना पाये जाने के फलस्वरूप उक्त प्रकरण में दिनांक 05 अप्रैल 2005 को दरोगा के विरूद्ध थाना फेस-1, नोएडा में धारा 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया.
याची के ऊपर यह भी आरोप था कि वायरल वीडियो के अवलोकन से याची द्वारा घूस लेना स्वतः स्पष्ट हो रहा है एवं दरोगा के विरूद्ध पंजीकृत अपराधिक अभियोग गम्भीर अपराध की श्रेणी में आता है. अभियोग की विवेचना प्रचलित है तथा दरोगा प्रदीप कुमार गौतम द्वारा कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही बरतते हुए गैर जिम्मेदारीपूर्ण, स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता के साथ-साथ पुलिस जैसे अनुशासित विभाग की छवि को धूमिल की गयी है.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस कर्मी की बर्खास्तगी बगैर विभागीय कार्यवाही के अवैध है. उ०प्र० अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दण्ड एवं अपील) नियमावली 1991 के नियम-8 (2) (बी) के प्रावधानों के अन्तर्गत पर्याप्त साक्ष्य के आधार होंने पर भी बगैर स्पष्ट कारण बताये कि क्यों विभागीय कार्यवाही नहीं की जा सकती, बर्खास्त करना नियम एवं कानून के विरूद्ध है.
याचिका में कहा गया है कि याची के ऊपर बर्खास्तगी आदेश में जो आरोप लगाये गये है वह बिल्कुल असत्य एवं निराधार है, एवं याची को साजिशन अभियुक्त द्वारा षडयंत्र करके झूठा फसाया गया है, जबकि याची ने रिश्वत के एवज में कोई भी पैसा नहीं लिये है और न ही याची के पास से कोई रिकवरी हुई है.
याची के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि उक्त प्रकरण में बगैर विभागीय कार्यवाही किये हुए एवं बगैर नोटिस तथा सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुये याची को सेवा से पदच्युत किया गया है, जो कि सर्वोच्च न्यायालय एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रतिपादित किये गये विधि की व्यवस्था के विरूद्ध है.
हाईकोर्ट ने अपर पुलिस आयुक्त, मुख्यालय गौतमबुद्धनगर द्वारा दरोगा के विरूद्ध पारित बर्खास्तगी आदेश 05 अप्रैल 2025 को रद्द कर दिया एवं याची को बहाल करने का आदेश पारित किया है.
ये भी पढ़ें: जस्टिस बीवी नागरत्ना बनेंगी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सदस्य, 2027 में बनेंगी भारत की पहली महिला CJI
-भारत एक्सप्रेस
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने एसआरएफटीआई में हुई झड़प, एसआईआर विवाद, 30 सितंबर की इंडिया…
Delhi Gold Price Today: त्योहारों से पहले दिल्ली के बाजार में सोना-चांदी के दाम गिर…
Neha Jha Bail: समस्तीपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में 75 लीटर विदेशी शराब के साथ…
US China Trade Deal: अमेरिका और चीन ने वॉशिंगटन वार्ता के बाद 30 अरब डॉलर…
Ulhasnagar Kidnapping Case: महाराष्ट्र के ठाणे में एक कारोबारी के अपहरण और 50 लाख रुपये…
Kathua Police Bribery Video Viral: कठुआ जिले में ट्रक चालक से कथित तौर पर 100…