ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर (Angela Reiner) ने घर खरीद में टैक्स (Tax) कम भुगतान के आरोप के बाद जांच झेलते हुए इस्तीफा दे दिया. यह कदम ब्रिटेन (Britain) की राजनीति में जवाबदेही और नैतिकता की मिसाल बन गया है लेकिन अगर यही आरोप भारत में किसी बड़े नेता पर लगते तो नतीजे कुछ और ही होते. यहां नेता का इस्तीफा देना जरूरी नहीं माना जाता. कई बार वे जांच के दौरान भी पद पर बने रहते हैं और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हैं.
भारत में नेताओं पर आय से अधिक संपत्ति, टैक्स गड़बड़ी और अवैध लेनदेन के आरोप लगते रहे हैं. यहां मामला सिर्फ नैतिकता तक सीमित नहीं रहता है बल्कि अदालत और जांच एजेंसियों तक पहुंचता तो है लेकिन इस्तीफा देना या राजनीतिक जीवन से दूरी बनाना कोई आम बात नहीं है.
सबसे पहले बात करते है उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayavati) की, उनपर आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ था. CBI ने जांच की, मामला अदालत में चला, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ जस की तस बनी रही. वे कई बार सत्ता में भी आईं.
इसी तरह मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) और उनके परिवार पर भी ऐसे ही आरोप लगे थे. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सीबीआई जांच के आदेश तो दिए, लेकिन मुकदमे लंबे समय तक चले और इसका राजनीतिक असर सीमित रहा. मुलायम सिंह यादव और उनकी पार्टी पर इसका थोड़ा भी असर नहीं पड़ा.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का मामला और भी बड़ा है. चारा घोटाले में उन्हें जेल जाना पड़ा और अदालत से सजा भी हुई. इसके बावजूद उन्होंने अपनी पार्टी पर पकड़ बनाए रखी और जेल में रहते हुए भी राजनीति पर असर डालते रहे.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का मामला भी चर्चा में रहा. उनके खिलाफ कई आरोप लगे, यहां तक कि जेल भी जाना पड़ा था लेकिन उन्होंने पद नहीं छोड़ा था. हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया था. उनकी पार्टी के मंत्री सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया भी जेल में रहते हुए लंबे समय तक मंत्री पद पर बने रहे.
अब बात करते हैं ताजा मामले की. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) एक महिला IPS अधिकारी को कथित तौर पर धमकाने को लेकर विवादों में घिर गए हैं. यह घटना 3 सितंबर को सोलापुर जिले के माढा तालुका के कुरडू गांव में हुई. वहां अवैध मुरुम खनन की शिकायत पर IPS अधिकारी अंजना कृष्णा कार्रवाई करने पहुंची थीं. उसी दौरान वहां के स्थानीय NCP कार्यकर्ता ने अजित पवार को फोन लगाया और अधिकारी को बात करने के लिए फोन थमा दिया.
वीडियो में देखा गया कि अधिकारी ने पहले पहचान न होने पर कहा कि आप मुझे मेरे नंबर पर कॉल करें. इतना सुनते ही अजित पवार नाराज हो गए और बोले,
“इतना आपको Daring हुआ है क्या? मैं खुद बात कर रहा हूं और आप कह रही हैं कि कॉल करें. एक मिनट मैं तेरे ऊपर एक्शन लूंगा. इसके बाद उन्होंने वीडियो कॉल कर अधिकारी को कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए.”
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने इस पर हमला बोलना शुरू कर दिया. शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने सवाल उठाया कि क्या अजित पवार को पता भी है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट से क्या पोस्ट हो रहा है. जबकि उनकी पार्टी के नेता अमोल मिटकरी ने IPS अधिकारी के दस्तावेजों की जांच की मांग UPSC से कर दी.
अजित पवार ने सफाई दी कि उनका इरादा कानून व्यवस्था में हस्तक्षेप करने का नहीं था बल्कि वे चाहते थे कि स्थिति शांत बनी रहे. उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस बल और महिला अधिकारियों का सम्मान है और वे कानून के शासन को सर्वोपरि मानते हैं.
देश की राजनीति में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. चुनाव अधिकार संस्था एडिआर (Association for Democratic Reforms) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश के 30 मौजूदा मुख्यमंत्रियों में से 12 ने खुद मंजूर किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. साफ शब्दों में कहे तो कुल 40 ऐसे मुख्यमंत्री है जिनके ऊपर कानूनन केस चल रहे हैं.
सबसे ज्यागा मामले तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कबूल किए हैं. ADR रिपोर्ट (ADR Report) के मुताबिक मुख्यमंत्री रेड्डी के ऊपर करीब 89 मामले दर्ज हैं. वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की बात करे तो उन पर 47 मामले दर्ज हैं. इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 19, कर्नाटक के सिद्धारमैया ने 13 और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 मामले कबूल किए हैं.
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महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चार-चार केस बताए हैं. जबकि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने दो और पंजाब के भगवंत मान ने एक मामला घोषित किया है.
रिपोर्ट (ADR Report) में यह भी बताया गया है कि इन मामलों में से कई बेहद गंभीर हैं. करीब 33 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों ने हत्या के प्रयास, अपहरण, रिश्वतखोरी और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े केस घोषित किए हैं. ये आंकड़े उनके चुनावी हलफनामों से लिए गए हैं जो उन्होंने चुनाव लड़ने से पहले चुनाव आयोग को सौंपे थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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