स्वतंत्रता दिवस और पतंग
Independence Day 2025: 15 अगस्त 2025 को भारत को आजाद हुए पूरे 78 साल हो रहे हैं. इसी खुशी में देश 79वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. कोने-कोने में जश्न का माहौल है. महीनों से चल रही तैयारियों की तश्वीर दिखने लगी है. इस उत्सव को लोग अलग-अलग तरीके से मना रहे हैं. इसे में एक तरीका दिल्ली-NCR के इलाकों में पतंगबाजी करने का है. ये जानकर कई बार लोगों को अचंभा लगता है लेकिन इसके पीछे अंग्रेजों के विरोध की कहानी है. आइये जानें जमाने में विरोध की प्रतीक रहीं पतंगे आज कैसे जश्न का सिंबल बन गई हैं.
हर साल 15 अगस्त को जब भारत अपना स्वतंत्रता दिवस (Independence Day History) मनाता है, तो कई शहरों का आसमान पतंगों से भर जाता है. पतंग उड़ाने की परंपरा ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से भारत की आजादी से गहराई से जुड़ी हुई है, क्योंकि इसे कभी विरोध के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. आज, पतंगबाज एक-दूसरे की पतंग की डोर को मांझे से काटने की कोशिश करते हुए, एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं.
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, 1927 में साइमन कमीशन के विरुद्ध एक आंदोलन के दौरान भारतीयों ने शांतिपूर्ण विरोध के रूप में ‘साइमन वापस जाओ’ जैसे नारे लिखी पतंगें उड़ाईं. साइमन कमीशन, ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत सरकार अधिनियम 1919 की समीक्षा करने और सुधारों की सिफारिश करने के लिए भेजे गए सात ब्रिटिश सांसदों का एक समूह था.
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1947 में जब भारत को आजादी (India Independence Day) मिली तब से पतंगें स्वतंत्रता, राष्ट्रीय गौरव और आजादी की खुशी का प्रतीक बन गईं. इस प्रकार पतंगबाजी एक देशभक्ति का प्रतीक बन गई. एकता और स्वतंत्रता का जश्न मनाती है. स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी की परंपरा शुरू करने का श्रेय किसी विशेष व्यक्ति या समूह को नहीं दिया जाता. यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वाभाविक रूप से उभरी और 1920 के दशक में प्रमुखता से दिखी.
पतंगबाजी एक मनोरंजक और प्रतिस्पर्धी गतिविधि के रूप में स्वतंत्रता संग्राम से भी पहले से चली आ रही है. यह मुगल शासन के दौरान लोकप्रिय हुई और मकर संक्रांति और बसंत पंचमी जैसे हिंदू त्योहारों का भी एक अभिन्न अंग है. लेकिन पतंगबाजी की लोकप्रियता कम हो रही है. शहरीकरण, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और ‘चीनी मांझे’ जैसे सिंथेटिक धागों पर प्रतिबंध ने कुछ इलाकों में पतंगबाजी में लोगों की भागीदारी कम कर दी है.
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पतंगबाजी एक ऐतिहासिक परंपरा है जो स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हुई है. आज, यह एक देशभक्ति का प्रतीक बन गई है, जो एकता और स्वतंत्रता का जश्न मनाती है. स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी की परंपरा एक अनोखा तरीका है जिससे लोग देशभक्ति और एकता का जश्न मनाते हैं.
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