Indian Air Force: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कई ब्रिटिशकालीन निर्मित पुरानी हवाई पट्टियां हैं जिनका उपयोग 1942 द्वितीय विश्व युद्ध और भारत पाक 1971 युद्ध में हुआ. इनमें प्रयागराज, गाजीपुर और रायबरेली प्रमुख हैं. फिलहाल, ये हवाई पट्टियां वीरान पड़ी हुई हैं, लेकिन भारत पाक तनाव के कारण ये दोबारा चर्चा में आ गई हैं. भारतीय सेना इनको ठीक कराने की कवायद में जुट गई है, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उपयोग में लाया जा सके.
प्रयागराज स्थित पड़िला हवाई पट्टी का निर्माण अंग्रेजी सरकार ने 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कराया था. 1094 एकड़ में फैली इस हवाई पट्टी का उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध और 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी हुआ था. तब यहां लड़ाकू विमान, सेना के मालवाहक विमान और बतौर एयरफोर्स डिपो इस्तेमाल किया गया था. 76 वर्षों बाद भारतीय वायु सेना ने साल 2017 में भी हवाई पट्टी की रिपेयरिंग कराकर कुछ विमानों की लैंडिंग कराई थी. साथ ही कुछ विमानों ने उड़ान भी भरी थी, लेकिन इसके बाद ये हवाई पट्टी फिर से वीरान हो गई.
आपको बता दें कि इस हवाई पट्टी की 30 बीघा जमीन ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर लिया था, लेकिन भारत-पाक तनाव के बाद सेंट्रल एयर कमांड ने इसे ठीक कराने के आदेश दिए हैं. इसके बाद सेना ने बुलडोजर से अवैध अतिक्रमण हटाकर इसे कब्जा मुक्त कराया. अब हवाई पट्टी को फिर से ठीक करने की कवायद शुरू कर दी गई है. क्षेत्र के वृद्ध ग्रामीणों की मानें, तो अंग्रेजी सरकार ने भारत से जाते समय इस हवाई पट्टी पर तोड़-फोड़ कर इसे काफी नुकसान पहुंचाया था. अब फिर से इस हवाई पट्टी को भारतीय सेना के उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है.
ब्रिटिश सरकार ने 1942 में गाजीपुर जनपद में 2 हवाई पट्टियां बनवाई थीं. जिले में पहली हवाई पट्टी अंधऊ गांव में 63 एकड़ में बनी और दूसरी मोहम्मदाबाद के गौसपुर गांव में बनाई गई. तब अंग्रेजी हुकूमत ने फाइटर प्लेन और अन्य जहाजों की लैंडिंग व उड़ान के लिए ये हवाई पट्टियां बनवाईं थीं. जब द्वितीय विश्व युद्ध में जापान लगातार भारत पर हमला कर रहा था, क्योंकि जापान नेपाल और बर्मा देश की हवाई पट्टियों का उपयोग कर रहा था. इसी को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजी हुकूमत ने इन हवाई पट्टियों का निर्माण कराया था. फिलहाल, इन हवाई पट्टियों का उपयोग सिर्फ छोटे प्लेन और हेलीकॉप्टर की लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए किया जाता है.
रायबरेली के सदर तहसील के इकछनियां गांव स्थित 500 बीघे में हवाई पट्टी है. इसका निर्माण ब्रिटिश सरकार ने 1937 से 1942 के बीच युद्ध के मद्देनजर कराया था. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने अपनी बेटी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ इसी हवाई पट्टी से एक बार दिल्ली के लिए उड़ान भी भरी थी. फिलहाल, इस हवाई पट्टी का पुराना कंट्रोल रूम बहुत जर्जर स्थिति में है, जो विमानों की लैंडिंग व उड़ान के समय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था. अब भारत सरकार ने दोबारा इस हवाई पट्टी को ठीक कराना शुरू कर दिया है. इसको लेकर बाकायदा राष्ट्रीय विमानन प्राधिकरण ने जिलाधिकारी रायबरेली से हवाई पट्टी से संबंधित सभी सूचनाएं मांगी हैं.
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे (Lucknow Agra Expressway), यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway), पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) सामरिक नजरिए से काफी अहम है. यहां भारतीय वायु सेना (India Air Force) के कई फाइटर प्लेन (Fighter Plane) समय-समय पर अभ्यास कर चुके हैं. ऐसे में ये एक्सप्रेसवे युद्ध के दौरान कभी भी उपयोग में लाए जा सकते हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण केंद्र है.
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