भारतीय नौसेना आज एक ऐसी जालबद्ध संयुक्त शक्ति बन चुकी है, जो वायु, सतह और जल-स्तर के नीचे से आने वाले खतरों का एकसाथ सामना करने में पूरी तरह सक्षम है. एडवांस्ड सेंसर और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के तालमेल से नौसेना लगातार समुद्री क्षेत्र में निगरानी, पहचान और खतरे के पूर्व संकेत को मजबूत बना रही है.
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के कैरियर बैटल ग्रुप ने एयर डिफेंस की बहुस्तरीय व्यवस्था के तहत समुद्री क्षेत्र में दुश्मनों को कई सौ किलोमीटर दूर तक आने से रोके रखा. मिग-29K लड़ाकू विमानों और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग हेलीकॉप्टर्स की तैनाती ने किसी भी संदिग्ध या दुश्मन विमान को कैरियर ग्रुप के नजदीक फटकने नहीं दिया.
वीएडम एएन प्रमोद ने कहा, “हमारी ताकतवर नौसेना, चाहे ड्रोन हों या हाई-स्पीड मिसाइल, हर खतरे को पहचानकर समय रहते खत्म करने में पूरी तरह सक्षम है.”
पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय नौसेना ने अपने एंटी-मिसाइल और एंटी-एयरक्राफ्ट डिफेंस सिस्टम का वास्तविक खतरे वाले माहौल में सफल परीक्षण किया था.
भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप ने अपनी आक्रामक क्षमता का लोहा मनवाते हुए ऑपरेशन एरिया में निर्विरोध दबदबा बनाए रखा, जिसके चलते पाकिस्तानी वायुसेना के तत्वों को मकरान तट के पास सिमटे रहने को मजबूर होना पड़ा.
वीएडम प्रमोद ने स्पष्ट संदेश दिया — “भारतीय नौसेना समुद्र में किसी भी खतरे को पहचानने, रोकने और जवाब देने में सक्षम है. यदि हम चाहें, तो हम कभी भी, कहीं भी सटीक स्ट्राइक कर सकते हैं.”
-भारत एक्सप्रेस
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